सोशल संवाद/डेस्क: मौसम में बदलाव और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के बीच डेंगू का खतरा भी बढ़ जाता है। डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली-उल्टी और त्वचा पर रैशेज जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, संक्रमित मच्छर के काटने के करीब 4 से 10 दिन बाद लक्षण शुरू हो सकते हैं।
यह भी पढे : बार-बार सिरदर्द होना नहीं है सामान्य, ये 5 वजहें हो सकती हैं जिम्मेदार
शरीर पर लाल चकत्ते भी हो सकते हैं डेंगू का संकेत
डेंगू के मरीजों में त्वचा पर लाल चकत्ते या रैशेज दिखाई देना आम लक्षणों में शामिल है। हालांकि केवल रैशेज देखकर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी या रैशेज जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बुखार कम होना हमेशा ठीक होने का संकेत नहीं
डेंगू में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होने के बाद भी मरीज की हालत बिगड़ सकती है। WHO के अनुसार, बीमारी के करीब 3 से 7 दिन के बीच गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत सामने आ सकते हैं। इसलिए बुखार उतरने के बाद भी मरीज की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
इन Warning Signs को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डेंगू के दौरान निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए:
- तेज पेट दर्द या पेट में लगातार दर्द
- बार-बार और लगातार उल्टी
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- उल्टी या मल में खून आना
- तेज सांस चलना या सांस लेने में परेशानी
- अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी
- त्वचा का पीला, ठंडा या चिपचिपा होना
- बहुत ज्यादा प्यास लगना
ये गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत हो सकते हैं और ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सा देखभाल जरूरी है।
डेंगू से बचाव कैसे करें?
डेंगू फैलाने वाला Aedes मच्छर दिन के समय भी सक्रिय रहता है। इससे बचने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और घर के आसपास पानी जमा न होने दें। पानी की टंकियों और कंटेनरों को ढककर रखें तथा नियमित रूप से साफ करें।
डेंगू होने पर क्या करें?
डेंगू की आशंका होने पर डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना जरूरी है। WHO के अनुसार बुखार और दर्द के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन एस्पिरिन या इबुप्रोफेन जैसी दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का जोखिम बढ़ सकता है।












