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भागवत कथा के तीसरे दिन बावन व नरसिंह अवतार का विस्तृत वर्णन, भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु

By Aditi Pandey

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Bhagwat Katha detailed description of the Bawan भागवत

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सोशल संवाद/डेस्क: भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक नीरज मिश्रा ने बावन अवतार और नरसिंह अवतार का विस्तारपूर्वक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि संसार में सबसे अधिक कष्ट कुंती ने सहा है और उनसे अधिक दुख किसी को नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जीवन में जब कठिन समय आता है, तब धैर्य और संयम रखना ही सबसे बड़ी साधना है। संकट की घड़ी में भगवान का भजन मनुष्य को शक्ति और मार्गदर्शन देता है।

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कथावाचक ने कहा कि जीवन में अनुराग और वैराग्य दोनों आते हैं, लेकिन हर कार्य को धैर्य और धीरे-धीरे करने से ही सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि जीवन की सबसे बड़ी विपत्ति वह होती है, जब मनुष्य के जीवन में भगवान का स्मरण और भजन नहीं होता। यदि भक्ति जीवन में हो, तो हर संकट सहज रूप से कट जाता है।

कथा के दौरान भीष्म पितामह और द्रौपदी के बीच हुए संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया गया। शैय्या पर पड़े भीष्म पितामह के अंतिम दिनों के कष्टों और उनके उपदेशों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि गलत व्यक्ति का संग और अनुचित तरीके से अर्जित धन हमेशा विनाश का कारण बनता है। साथ ही राजा परीक्षित के जन्म, नामकरण और उनके जीवन प्रसंगों का भी वर्णन किया गया। युधिष्ठिर द्वारा परीक्षित को दिए गए उपदेशों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कथा के दौरान पूरा पंडाल भजनों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्तिरस में झूमते नजर आए। सभी श्रोता मंत्रमुग्ध होकर कथा श्रवण करते रहे। कथा के समापन पर आरती की गई, भोग अर्पित किया गया और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से पश्चिम विधायक सरयू राय, जिला परिषद सदस्य डॉ. कविता परमार, मंजू सिंह, सुधीर सिंह, पवन सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में शत्रुघ्न प्रसाद, संजय गुप्ता, रूपा गुप्ता, स्वाति गुप्ता, अमर भूषण, देवाशीष झा समेत कई लोगों की सक्रिय भूमिका रही।

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