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भारत बंद 2026: मजदूर-किसान सड़कों पर, कई राज्यों में परिवहन व बैंकिंग सेवाएं प्रभावित

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : देशभर में ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। विभिन्न संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर रैलियां, धरना-प्रदर्शन और मार्च निकाले। सुबह से ही कई राज्यों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई शहरों में राज्य परिवहन निगम की बसें डिपो में ही खड़ी रहीं, जबकि ऑटो और स्थानीय वाहन सेवाएं आंशिक रूप से संचालित हुईं। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर विरोध दर्ज कराया, जिससे यातायात बाधित रहा।

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बैंकिंग सेवाओं पर भी बंद का असर नजर आया। सरकारी बैंकों की कई शाखाओं में कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कामकाज धीमा रहा, हालांकि निजी बैंक और एटीएम सेवाएं अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य रूप से चलती रहीं। सरकारी दफ्तरों में भी कर्मचारियों की संख्या कम होने से आम लोगों के जरूरी कार्यों में देरी हुई। औद्योगिक क्षेत्रों में कई फैक्ट्रियों में श्रमिकों ने हड़ताल में हिस्सा लिया, जिससे उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। बाजारों में मिला-जुला माहौल रहा कुछ शहरों में दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, तो कई स्थानों पर आंशिक रूप से व्यापार जारी रहा।

हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ट्रेड यूनियन मंच का दावा है कि करोड़ों मजदूरों ने इस आंदोलन में भाग लिया। उनके अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन श्रम कानूनों में बदलाव, निजीकरण की नीतियों और किसानों से जुड़े मुद्दों के खिलाफ है। किसान संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देने, मनरेगा को मजबूत बनाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग दोहराई। कई छात्र और युवा संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन किए।

रेल और हवाई सेवाओं पर बड़े स्तर पर असर नहीं देखा गया, हालांकि कुछ इलाकों में यात्रियों को स्थानीय परिवहन की कमी के कारण मुश्किलें झेलनी पड़ीं। प्रशासन ने कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई और पुलिस बल तैनात किया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। कई राज्यों में शांति बनाए रखने की अपील भी जारी की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के राष्ट्रव्यापी बंद से आर्थिक गतिविधियों पर अल्पकालिक असर पड़ सकता है, लेकिन इससे नीतिगत मुद्दों पर चर्चा तेज हो जाती है। फिलहाल सरकार और संगठनों के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आंदोलन के बाद क्या ठोस समाधान निकलता है और आम जनता पर इसका कितना असर पड़ता है।

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