Bike Taxi News: बाइक टैक्सी को मिल सकती है मंजूरी, बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द!

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / डेस्क : देश में बाइक टैक्सी को लेकर जल्द बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने निजी दोपहिया वाहन मालिकों को बाइक टैक्सी के तौर पर यात्रियों को ले जाने की अनुमति देने की पैरवी की है। इसके साथ ही उन्होंने बार-बार यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

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गडकरी के प्रस्ताव में एक तरफ दोपहिया वाहन मालिकों के लिए कमाई के नए अवसर पैदा करने की बात है, तो दूसरी तरफ सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

बाइक टैक्सी को लेकर राज्यों से कदम उठाने की अपील

एक सार्वजनिक कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने कहा कि निजी दोपहिया वाहन मालिकों को बाइक टैक्सी ऑपरेटर के रूप में यात्रियों को ले जाने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकारों से भी इस दिशा में जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया। गडकरी के मुताबिक, बाइक टैक्सी की सुविधा बढ़ने से खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए आय के अतिरिक्त साधन तैयार हो सकते हैं।

बाइक टैक्सी का इस्तेमाल पहले से ही कई शहरों में ऐप आधारित परिवहन सेवाओं के तौर पर किया जा रहा है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में इसके नियम और अनुमति को लेकर स्थिति एक जैसी नहीं है।

बाइक टैक्सी से रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद

केंद्रीय मंत्री ने बाइक टैक्सी को सिर्फ परिवहन सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि रोजगार और आय के अवसर से जोड़कर देखा है। भारत में बड़ी संख्या में परिवार दोपहिया वाहनों पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर निजी बाइक मालिकों को नियमानुसार यात्रियों को ले जाने की अनुमति मिलती है, तो वे अपने वाहन से अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।

हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी काफी हद तक राज्य सरकारों और उनके परिवहन विभागों पर होगी।

बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्ती

बाइक टैक्सी के साथ नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों को लेकर भी सख्त रुख दिखाया। उन्होंने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों को अंतिम रूप दिया गया है। इसके तहत यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए नकारात्मक अंक प्रणाली (Negative Points System) लागू करने का प्रस्ताव है।

इस व्यवस्था में हर उल्लंघन पर चालक के रिकॉर्ड में नकारात्मक अंक जुड़ेंगे। अगर कोई व्यक्ति लगातार नियम तोड़ता है और एक तय सीमा तक नकारात्मक अंक पहुंच जाते हैं, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।

एक गलती नहीं, बार-बार उल्लंघन करने वालों पर नजर

प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य हर छोटी गलती पर चालक को कठोर दंड देना नहीं, बल्कि बार-बार यातायात नियम तोड़ने वाले लोगों पर कार्रवाई करना बताया गया है। इससे वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों को लेकर अधिक जिम्मेदारी आने और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्यों में इसे कितनी प्रभावी और समान तरीके से लागू किया जाता है।

हाईवे और खनन क्षेत्र के श्रमिकों के लिए ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोजेक्ट

नितिन गडकरी ने इस दौरान ‘सुरक्षा’ नाम से एक पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया। इसका उद्देश्य हाईवे और खनन परियोजनाओं से जुड़े ड्राइवरों, निर्माण श्रमिकों और अन्य उच्च जोखिम वाले कर्मचारियों को मुफ्त स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराना है। इस योजना का शुरुआती परीक्षण NH-44 के नागपुर-कामठी सेक्शन और महाराष्ट्र के चंद्रपुर के खनन क्षेत्र में किया जा रहा है।

पहले चरण में 10 हजार लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य

पायलट प्रोजेक्ट करीब 150 किलोमीटर के क्षेत्र में लागू किया जा रहा है। इसके शुरुआती चरण में लगभग 10,000 लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, व्यापक स्तर पर इस कार्यक्रम के जरिए करीब 10 लाख श्रमिकों तक पहुंचने की योजना बताई गई है। इस पहल में ड्राइवरों और श्रमिकों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान और शुरुआती स्तर पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा को जोड़ा गया

लंबे समय तक वाहन चलाने वाले ड्राइवरों में थकान, नजर से जुड़ी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य परेशानियां सड़क सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में स्वास्थ्य जांच को सड़क सुरक्षा से जोड़ने की पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाईवे और निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की बेहतर स्वास्थ्य स्थिति दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

राज्यों की भूमिका होगी अहम

बाइक टैक्सी को लेकर केंद्र की ओर से दिए गए संकेतों के बाद अब राज्य सरकारों और परिवहन विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।

बाइक टैक्सी के संचालन, परमिट, यात्रियों की सुरक्षा और ड्राइवरों के नियमों से जुड़े प्रावधानों को लेकर राज्यों को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी होगी। इसी तरह, नकारात्मक अंक प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग और लाइसेंसिंग अथॉरिटी के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।

क्या बदल सकता है?

अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो देश में दोपहिया वाहन मालिकों के लिए आय का नया विकल्प, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए कड़ा लाइसेंसिंग सिस्टम और हाईवे श्रमिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य निगरानी देखने को मिल सकती है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकारें बाइक टैक्सी और प्रस्तावित ट्रैफिक नियमों को लेकर किस तरह आगे बढ़ती हैं।

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