भाजपा ने सरकारी योजना से बाहर करने के लिए एसआईआर में कटवा दिए लाखों पूर्वांचलियों के वोट : संजीव झा

By Riya Kumari

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भाजपा ने सरकारी योजना से बाहर करने के लिए एसआईआर में कटवा दिए लाखों पूर्वांचलियों के वोट : संजीव झा

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सोशल संवाद / नई दिल्ली :   आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक संजीव झा ने एसआईआर के बहाने लाखों लोगों के वोट काटने के पीछे भाजपा की बड़ी साजिश की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सरकारी योजना से बाहर करने के लिए एसआईआर में लाखों पूर्वांचलियों के वोट कटवा दिए हैं। अब वोटर लिस्ट में नाम न होने से लाखों गरीब महिलाएं दिल्ली लक्ष्मी योजना से बाहर हो जाएंगी।

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उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 66 फीसद लोग ही एसआईआर में हिस्सा ले पाए हैं। चुनाव आयोग ने 47.58 लाख से ज्यादा वोट काट दिए गए हैं। अब स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग ने मनमाना वोट काटने के लिए ही ‘‘आप’’ प्रतिनिधिमंडल को मांगने के बाद भी शिफ्टेड लोगों का डाटा नहीं दिया। चुनाव आयोग अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। वरना लाखों लोग मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।

बुधवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर पार्टी के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष व बुराड़ी विधायक संजीव झा ने कहा कि दिल्ली में एसआईआर का काम पूरा हो गया है और इसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं। दिल्ली में 47,58,455 लोगों के वोट काट दिए गए हैं। जिलेवार आंकड़े देखें तो साउथ ईस्ट जिले में केवल 56 फीसद ही एसआईआर हो पाया है, यानी वहां 44 फीसद लोगों के वोट काट दिए गए हैं। इसी तरह नई दिल्ली में 60 फीसद और साउथ जिले में 61 फीसद ही एसआईआर हुआ है। कुल मिलाकर दिल्ली में औसतन 65-66 फीसद ही एसआईआर हो पाया है और लगभग 34 फीसद लोगों के वोट काट दिए गए हैं।

संजीव झा ने कहा कि चुनाव आयोग का कहना है कि लोगों के शिफ्ट होने के कारण ये वोट काटे गए हैं। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला था और यही चिंता जाहिर की थी। चुनाव आयोग को बताया गया था कि शिफ्ट होने के नाम पर भारी संख्या में वोट काटे जा रहे हैं और इनमें ज्यादातर लोग बिहार, यूपी और अन्य राज्यों से आए प्रवासी हैं। पार्टी ने सुझाव दिया था कि जो लोग शिफ्टेड दिखाए गए हैं, उनका बूथवार डाटा (पता और फोन नंबर) दिया जाए ताकि हमारे बीएलए अपने स्तर पर इसकी जांच कर सकें कि वे वास्तव में कहां शिफ्ट हुए हैं। इससे चुनाव आयोग को भी लोगों की सही पहचान करने में आसानी होती।

संजीव झा ने कहा कि कई बीएलओ पर काम पूरा करने का भारी दबाव था, जिसके कारण उन्होंने घर बैठे ही लोगों को शिफ्टेड दिखा दिया। अनधिकृत कॉलोनियों और झुग्गियों में स्थिति बहुत जटिल है। वहां एक ही घर और एक ही परिवार के लोगों के वोट चार अलग-अलग बूथों पर होते हैं, इसलिए उन्हें पहचानना मुश्किल होता है। कई बीएलओ ने वहां जाकर बिल्कुल काम नहीं किया। पार्टी ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया था कि जिन बूथों पर 50 फीसद से कम काम हुआ है, वहां के बीएलओ की सभी पार्टियों के बीएलए के साथ एक बैठक कराई जाए। चुनाव आयोग ने उस समय सारी बातें मान ली थीं, लेकिन बाद में धोखा दिया। आयोग ने न तो शिफ्ट हुए लोगों का कोई डाटा दिया, न कोई बैठक कराई और आनन-फानन में एसआईआर का काम खत्म कर दिया।

संजीव झा ने कहा कि चुनाव आयोग जानबूझकर यह चाहता है कि यूपी, बिहार और अन्य राज्यों से आए प्रवासियों के वोट काट दिए जाएं। दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग नौकरी के लिए आते हैं और किराए के मकानों में रहते हैं, जिससे उनका पता बदलता रहता है। ऐसे में चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह उनकी पहचान करे, लेकिन बीएलओ ने अपने सेंटर पर बैठकर ही मनमर्जी से काम किया है। चुनाव आयोग ने सुझावों को लागू न करके दिल्ली के लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। चुनाव आयोग को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, वरना भारी संख्या में लोग अपने मताधिकार से वंचित रह जाएंगे।

संजीव झा ने कहा कि वोट कटने से लोग केवल मताधिकार से ही वंचित नहीं होंगे, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा। अब लक्ष्मी योजना के लिए वोटर आईडी कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। अगर छह महीने बाद किसी का वोट बनता भी है, तो वह तब तक इस योजना से वंचित ही रहेगा। यह एक साजिश है ताकि वोट ही काट दिया जाए और कम से कम लोग लक्ष्मी योजना में हिस्सा ले सकें। दिल्ली सरकार को भी इस मामले पर संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की होती है।

संजीव झा ने कहा कि एसआईआर की यह पूरी प्रक्रिया लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने के बजाय उन्हें बाहर निकालने की है। चुनाव आयोग को इस तरह की ज्यादती नहीं करनी चाहिए और लोगों की पीड़ा को समझना चाहिए। इतने बड़े पैमाने पर लोगों के वोट काटा जाना यह साफ दर्शाता है कि जानबूझकर प्रवासियों, झुग्गी-झोपड़ियों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनके वोटिंग के अधिकार से वंचित करने की साजिश की गई है।

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