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BJP सांसद बोले- सुप्रीम कोर्ट सीमाएं लांघ रहा:पार्टी का निशिकांत के बयान से किनारा; ओवैसी ने कहा-भाजपा कोर्ट को धार्मिक युद्ध की धमकी दे रही

By Riya Kumari

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BJP MP said- Supreme Court is crossing the limits: Party distanced itself from Nishikant's statement
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सोशल संवाद/डेस्क : सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को विधेयकों पर फैसला लेने के लिए एक समय सीमा तय करने का विवाद बढ़ता जा रहा है। इस पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ऐतराज जताया है। सांसद ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। ऐसे में आप (CJI) किसी अपॉइंटिंग अथॉरिटी को निर्देश कैसे दे सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘संसद इस देश का कानून बनाती है। क्या आप उस संसद को निर्देश देंगे। देश में गृह युद्ध के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना जिम्मेदार हैं। वहीं धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। कोर्ट अपनी सीमाओं से बाहर जा रहा है। अगर हर किसी को सारे मामलों के लिए सर्वोच्च अदालत जाना पड़े तो संसद और विधानसभा बंद कर देनी चाहिए।’

यह भी पढ़े : आप चुनाव आयुक्त नहीं मुस्लिम आयुक्त थे – निशिकांत दुबे सांसद बीजेपी

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वहीं, निशिकांत के बयान से बीजेपी ने किनारा किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा- निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा का न्यायपालिका एवं देश के चीफ जस्टिस पर दिए गए बयान से पार्टी का कोई लेना–देना नहीं है। यह इनका व्यक्तिगत बयान हैं। दरअसल ये मामला तमिलनाडु गवर्नर और राज्य सरकार के बीच हुए विवाद से उठा था। सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को आदेश दिया कि राज्यपाल के पास कोई वीटो पावर नहीं है। वहीं बिल पर राष्ट्रपति को 3 महीने के भीतर फैसला लेना होगा। यह ऑर्डर 11 अप्रैल को सामने आया था।

ओवैसी बोले- भाजपा कोर्ट को धार्मिक युद्ध की धमकी दे रही 

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- भाजपा नेता इतने कट्टर हो गए हैं कि अब वे कोर्ट को भी धार्मिक युद्ध की धमकी देने लगे हैं। आप लोग (BJP वाले) ट्यूबलाइट हो। कोर्ट को इस तरह धमका रहे हो। तुम्हें पता है आर्टिकल 142 क्या है? इसे डॉ. अंबेडकर ने संविधान में जोड़ा था। यह सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में पूर्ण न्याय देने का अधिकार देता है।

निशिकांत ने धारा 377, आईटी एक्ट और मंदिर-मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाए आर्टिकल 377: 

एक आर्टिकल 377 था, जिसमें समलैंगिकता एक अपराध था। अमेरिका में ट्रम्प सरकार ने कहा कि दुनिया में केवल दो ही लिंग है, एक- पुरुष, दूसरा- महिला। तीसरे की कोई जगह नहीं है। जितने भी धर्म हैं, चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, जैन हो, सिख हो, ईसाई हो। सभी मानते हैं कि समलैंगिकता एक अपराध है। सुप्रीम कोर्ट एक सुबह उठती है वे कहते हैं कि हम यह आर्टिकल खत्म करते हैं। हमने आईटी एक्ट बनाया। जिसके तहत महिलाओं और बच्चों के पोर्न पर लगाम लगाने का काम किया गया। एक दिन सुप्रीम कोर्ट कहता है कि वे 66A आईटी एक्ट को खत्म कर रहे हैं।

भाजपा ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती

नड्डा ने X पोस्ट में लिखा- भाजपा ऐसे बयानों से न तो कोई इत्तेफाक रखती है और न ही कभी भी ऐसे बयानों का समर्थन करती है। भाजपा इन बयान को सिरे से खारिज करती है। पार्टी ने सदैव ही न्यायपालिका का सम्मान किया है, उनके आदेशों और सुझावों को सहर्ष स्वीकार किया है, क्योंकि एक पार्टी के नाते हमारा मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय सहित देश की सभी अदालतें हमारे लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं। संविधान के संरक्षण का मजबूत आधारस्तंभ हैं। मैंने इन दोनों को और सभी को ऐसे बयान ना देने के लिए निर्देशित किया है।

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