सोशल संवाद/डेस्क : भारत में जल्द ही सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी या सख्त नियम लागू करने पर विचार कर रही है। यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल लत जैसी बढ़ती समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उठाया जा सकता है।
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सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 में संशोधन करने की संभावना पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाना या इस्तेमाल करना सीमित किया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर नजर
सरकार पूरी तरह से बैन लगाने के बजाय ‘उम्र आधारित रेगुलेशन’ मॉडल अपनाने पर चर्चा कर रही है। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लागू किया जा चुका है। इसी तरह फ्रांस ने भी कम उम्र के बच्चों के लिए सख्त नियम बनाए हैं। भारत सरकार भी अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का अध्ययन कर रही है ताकि एक संतुलित और व्यावहारिक नीति तैयार की जा सके।
क्यों उठ रहा है सोशल मीडिया बैन का मुद्दा?
हाल के वर्षों में बच्चों और किशोरों में स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ा है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में भी इस बात पर चिंता जताई गई कि अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों में एडिक्शन, साइबर बुलिंग, अश्लील कंटेंट की पहुंच और डीपफेक जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई, सामाजिक व्यवहार और आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है। इसी कारण ‘सोशल मीडिया बैन’ या ‘उम्र आधारित पाबंदी’ की मांग तेज हुई है।
DPDP एक्ट और बच्चों का डेटा
भारत में अभी ऐसा कोई स्पष्ट कानून नहीं है जो 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से पूरी तरह रोके। हालांकि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने के लिए सत्यापित अभिभावकीय सहमति आवश्यक है।

इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म्स को बच्चों की व्यक्तिगत जानकारी और टारगेटेड विज्ञापनों पर नियंत्रण रखना होता है। यदि सरकार नया नियम लाती है, तो एज वेरिफिकेशन सिस्टम और भी सख्त किए जा सकते हैं।
क्या होंगी चुनौतियां?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बड़े और डिजिटल रूप से सक्रिय देश में ‘सोशल मीडिया बैन’ लागू करना आसान नहीं होगा। कई बच्चे फर्जी उम्र दर्ज कर अकाउंट बना लेते हैं। ऐसे में प्लेटफॉर्म्स को मजबूत एज वेरिफिकेशन सिस्टम विकसित करना होगा।

इसके अलावा डिजिटल स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी जैसे मुद्दे भी सामने आ सकते हैं। इसलिए सरकार संतुलित नीति बनाने की दिशा में सोशल मीडिया कंपनियों और विशेषज्ञों से चर्चा कर रही है।










