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14 वीं जेपीएससी में गड़बड़ी का मामला शीर्ष कोर्ट पहुंचा

By Tamishree Mukherjee

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Case regarding irregularities in the 14th JPSC reaches the Supreme Court.

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सोशल संवाद / रांची : जेपीएससी की 14वीं पीटी में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने जनहित याचिका दायर की है। इसमें 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष व समयबद्ध जांच कराने का आग्रह किया गया है। याचिका में विशेष रूप से प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, ओएमआर शीट की कस्टडी व मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कराने का आग्रह किया गया है। प्रार्थी ने मामले की जांच सीबीआई से कराने या शीर्ष कोर्ट या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कमेटी गठित से कराने का भी आग्रह किया गया है।

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रिजल्ट जारी होने के बाद बढ़ा विवादः

याचिका के अनुसार, जेपीएससी ने दो जुलाई को पीटी रिजल्ट जारी किया था। इसके बाद एक सफल अभ्यर्थी की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी वायरल होने की बात सामने आई। याचिका में दावा किया है कि संबंधित अभ्यर्थी ने पहले पेपर में 100 में से केवल 48 प्रश्नों के उत्तर दिए थे। फिर भी उसे पीटी में सफल घोषित किया गया। इस मामले को लेकर परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। इसके बाद आयोग की ओर से मामले की जांच कराए जाने की जानकारी भी सामने आई।

याचिका में जेपीएससी के एक आधिकारिक नोटिस का भी उल्लेख किया गया है। इसमें आयोग ने सीआईडी जांच जारी होने की जानकारी दी थी। साथ ही आयोग ने सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर वन और पेपर टू की ओएमआर कार्बन कॉपी जमा करने को कहा था। प्रार्थी का कहना है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

झारखंड हाईकोर्ट में भी लंबित है मामला

प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गयी है। इस पर पूर्व में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और जेपीएससी को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। 23 सितंबर को मामले की सुनवाई निर्धारित है। हाईकोर्ट में अभ्यर्थी राजेश प्रसाद ने याचिका दायर कर कहा है कि आयोग की ओर से कट-ऑफ अंक जारी करने की प्रक्रिया, ओएमआर शीट अपलोड करने तथा परीक्षा परिणाम में सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने जैसी कई गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

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