Chambal Wildlife Sanctuary: अवैध रेत खनन पर शिकंजा, 100 से ज्यादा हथियारबंद वनकर्मी होंगे तैनात

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / डेस्क : चंबल वन्यजीव अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश वन विभाग ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग संवेदनशील इलाकों में 100 से ज्यादा हथियारबंद वनकर्मियों की तैनाती के साथ स्थायी चेक पोस्ट, CCTV कैमरे और AI आधारित निगरानी सिस्टम लगाने जा रहा है। इन व्यवस्थाओं को सितंबर तक शुरू करने की तैयारी है।

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44 संवेदनशील घाटों पर रहेगी विशेष नजर

चंबल वन्यजीव अभयारण्य के अधीक्षक श्याम सिंह के अनुसार, अभयारण्य के 44 संवेदनशील घाटों पर विशेष निगरानी की जाएगी। इन इलाकों में अवैध रेत खनन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। वन विभाग सुरक्षा व्यवस्था के तहत 16 स्थायी चेक पोस्ट और 35 CCTV कैमरे लगाएगा। इसके अलावा AI आधारित निगरानी प्रणाली की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जाएगी।

वनकर्मियों को मिलेंगी 12-बोर पंप एक्शन बंदूकें

अवैध खनन रोकने के लिए तैनात किए जाने वाले वनकर्मियों को 12-बोर पंप एक्शन बंदूकें उपलब्ध कराई जाएंगी। आपात स्थिति में हथियारों के इस्तेमाल के लिए उन्हें पुलिस की निगरानी में विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

मुरैना डिवीजन के 145 वन रक्षक और 45 वनपाल प्रशिक्षण लेने के बाद संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना और वन्यजीव क्षेत्र को सुरक्षित रखना है।

SOP के तहत होगी वनकर्मियों की ट्रेनिंग

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुभ्रंजन सेन ने बताया कि मुरैना में अवैध खनन रोकने के लिए वनकर्मियों को जरूरी संख्या में हथियार उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब उन्हें मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत प्रशिक्षण दिया जाएगा। ट्रेनिंग के बाद वनकर्मी संवेदनशील इलाकों में कार्रवाई के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे।

अवैध रेत खनन से वन्यजीवों पर खतरा

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य करीब 732 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसका विस्तार मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक है। यह इलाका घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और कई प्रजातियों के कछुओं समेत दुर्लभ वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है।

अवैध रेत खनन के कारण इन वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में वन विभाग की नई निगरानी व्यवस्था को अभयारण्य और उसके वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद बढ़ाई जा रही सुरक्षा

अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लिए जाने के बाद अभयारण्य की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का फैसला लिया गया है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभयारण्य में तैनात वन अधिकारियों और वन रक्षकों की जिम्मेदारी केवल जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। उन्हें अवैध रेत खनन, शिकार और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों से संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों की रक्षा जैसे जोखिम भरे काम भी करने पड़ते हैं।

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