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छऊ नृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक : सोनाराम बोदरा

By Riya Kumari

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छऊ नृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक : सोनाराम बोदरा

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सोशल संवाद / सरायकेला : सरायकेला के छोटा टंगरानी में जय माँ गायत्री छऊ नृत्य संस्था द्वारा आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ने लोककला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए आयोजन की सराहना की और छऊ नृत्य को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सोनाराम बोदरा ने कहा कि छऊ नृत्य केवल एक कला नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और गौरव का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह लोकनृत्य पीढ़ियों से चली आ रही समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम है, जिसे संरक्षित और प्रोत्साहित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छऊ नृत्य को अधिक से अधिक मंच देने की आवश्यकता है, ताकि यह कला वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना सके।

कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुति

सांस्कृतिक संध्या के दौरान कलाकारों ने आकर्षक छऊ नृत्य और अन्य पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों से दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों का प्रदर्शन अत्यंत प्रभावशाली रहा।

जिला परिषद अध्यक्ष ने सभी कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्होंने जय माँ गायत्री छऊ नृत्य संस्था के प्रयासों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने इस सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का सराहनीय कार्य किया है।

देर रात तक चला सांस्कृतिक उत्सव

कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीण, कला प्रेमी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। देर रात तक चले इस आयोजन में पारंपरिक लोककला, संगीत और सांस्कृतिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, कलाकारों और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों को जारी रखने का संकल्प लिया।

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