सोशल संवाद/जमशेदपुर : कॉलेजों में पठन-पाठन की प्रणाली को व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाने के लिए सभी कॉलेजों में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें बाजार की मांग के अनुसार कौशल से जुड़े कोर्स पढ़ाना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी करते ही कॉरपोरेट जगत की जरूरतों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
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इस दिशा में कोल्हान विश्वविद्यालय ने अपनी कमर कस ली है और छात्रों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण के रास्ते खोले जा रहे हैं। इसके तहत कॉलेज अब कॉरपोरेट कंपनियों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ औपचारिक करार कर रहे हैं। योजना के अनुसार, स्नातक के पाठ्यक्रम में शामिल एक पूरे सेमेस्टर की अनिवार्य इंटर्नशिप के लिए विद्यार्थियों को सीधे कंपनियों में भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम पहलू यह है कि छात्रों के इस एक सेमेस्टर की इंटर्नशिप का कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस करेंगे, जो अपने क्षेत्र के दिग्गज और अनुभवी विशेषज्ञ होंगे। इस पहल से विद्यार्थियों को शैक्षणिक शिक्षा के साथ कॉरपोरेट संस्कृति का सीधा और जमीनी अनुभव प्राप्त होगा। इसके लिए सभी कॉलेजों में विषयवार प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नियुक्त किए जाएंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं, जो पारंपरिक शैक्षणिक नियुक्तियों से काफी अलग हैं।
कोल्हान विश्वविद्यालय को इन नियमों का अनुपालन करना होगा। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के पद पर नियुक्ति के लिए पारंपरिक उच्च डिग्रियां जैसे पीएचडी या नेट होना अनिवार्य नहीं है। इसके स्थान पर उम्मीदवार का अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट व्यावहारिक अनुभव मायने रखता है। इसमें इंजीनियरिंग, विज्ञान, उद्यमिता, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान, मीडिया, कला, सिविल सेवा और लोक प्रशासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कम से कम 15 वर्ष का विशिष्ट और प्रतिष्ठित व्यावहारिक अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ नियुक्त होंगे।
शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों के 10 प्रतिशत होगी संख्या
कॉलेज अपने यहां स्वीकृत कुल फैकल्टी पदों के अधिकतम 10 प्रतिशत तक प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति कर करेंगे। इनकी नियुक्ति शुरुआत में संविदा के आधार पर एक वर्ष के लिए की जानी है। प्रदर्शन और आवश्यकता के आधार पर इसे बढ़ाया जा सकता है। उनकी नियुक्ति कॉलेज स्तर पर होगी और नियुक्ति के बाद कोल्हान विश्वविद्यालय को इस नियुक्ति की सूची भेजी जाएगी।









