उत्तराखंड में मुख्यमंत्री धामी कीमती सरकारी संपत्तियां कौड़ियों के दाम निजी हाथों में सौंपकर भ्रष्टाचार कर रहे- कांग्रेस

By Tamishree Mukherjee

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Chief Minister Dhami is engaging in corruption in Uttarakhand by handing over valuable government assets

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सोशल संवाद / डेस्क : कांग्रेस ने उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि वह कैबिनेट या संबंधित विभाग से सलाह किए बिना नियमों की अवहेलना करते हुए अकेले निर्णय लेकर कीमती सरकारी संपत्तियां कौड़ियों के दाम निजी हाथों में सौंप रहे हैं।

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कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए उत्तराखंड की प्रभारी महासचिव कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश में 40 स्थानों पर सरकारी जमीन, हेरिटेज प्रॉपर्टी और विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि निजी हाथों में दी जा रही हैं।

सैलजा ने विस्तार से बताया कि 20 दिसंबर 2022 को हुई कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया था कि प्रदेश के सभी विभागों की सरकारी जमीनों पर अंतिम निर्णय का अधिकार मुख्यमंत्री को होगा; सरकारी संपत्तियां बेचने और परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण हेतु उत्तराखंड निवेश एवं अवस्थापना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार चलाने की कार्य नियमावली के अनुसार हर विभाग का काम उसके मंत्री और पूरी मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी से चलता है। जमीनों और धरोहर भवनों को बेचने का फैसला एक व्यक्ति को सौंपना इसके बिल्कुल विपरीत है।

सैलजा ने कहा कि यूआईआईडीबी एक्ट की धारा 28 के तहत किसी भी सरकारी संपत्ति के मुद्रीकरण के लिए राज्य सरकार, संबंधित विभाग और बोर्ड की स्वीकृति आवश्यक है। इसके बावजूद नियमों की अवहेलना करते हुए मुख्यमंत्री ने तमाम अधिकार अपने हाथों में ले रखे हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने धामी को प्रॉपर्टी डीलर बताते हुए कहा कि सरकारी जमीन बेचने का फैसला वह अकेले कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यूआईआईडीबी के अध्यक्ष भी हैं, जिसे सरकारी जमीन मिलती है; यानी जमीन किससे लेनी है और किसे देनी है, ये दोनों फैसले पुष्कर सिंह धामी ही कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस नीलामी की शुरुआत मसूरी की हेरिटेज साइट जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट से हुई। दिसंबर 2022 में ही धामी ने 142 एकड़ जमीन 15 साल के लिए केवल एक करोड़ रुपये सालाना किराये पर बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की कंपनी के हवाले कर दी।

सैलजा ने बताया कि मुख्यमंत्री धामी के दो हस्ताक्षरों से विभिन्न विभागों की 1,080 एकड़ जमीन लेकर यूआईआईडीबी को दे दी गई। अब निजी पक्षों को जमीन सौंपने के लिए टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें पटवा डांगर की 14 एकड़ जमीन और अलकनंदा होटल शामिल है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने अन्य मामलों का जिक्र करते हुए बताया कि उत्तराखंड के ऋषिकेश में आईडीपीएल की 633 एकड़ जमीन यूआईआईडीबी को सौंप दी गई। इसके अलावा, अलग-अलग स्थानों पर अंग्रेजों के समय के बने 25 इंस्पेक्शन बंगले भी सौंप दिए गए। नैनीताल में होटल के लिए सीवेज प्लांट को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया। रामगढ़ में वन भूमि भी दे दी गई, जबकि उसे किसी को नहीं दिया जा सकता। पटवा डांगर की जमीन पांच रुपया प्रति वर्ग मीटर सालाना की दर से दी जा रही है और इस बारे में यह जानकारी भी सामने आई है कि इसे देश के एक बहुत बड़े औद्योगिक समूह को सौंपने को तैयारी है। उन्होंने बताया कि विकास नगर में डाक पत्थर की 190 एकड़ जमीन देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर लोगों ने विकास कार्यों के लिए दी थी। इस जमीन को उसके मूल मालिकों को वापस करने के बजाय दूसरे लोगों को सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया और संपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही; बाजार मूल्य से काफी कम दरों पर जमीनें दी जा रही हैं।

सैलजा ने कहा कि सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपना प्रदेश के हितों से खिलवाड़ है। यदि ये जमीनें एक बार निजी हाथों में चली गईं तो सरकार के लिए उन्हें दोबारा हासिल करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मामलों को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगी और कार्रवाई की अपील करेगी। यदि कार्रवाई नहीं होती है तो पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।

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