सोशल संवाद /डेस्क : जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान के बाद अब इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया संदेश में प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को “गुमराह बच्चे” बताते हुए उन्हें माफ करने की बात कही थी। अब इस बयान पर Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार से एक अहम सवाल पूछा है।
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दिपके का कहना है कि यदि प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से छात्रों को माफ करने की बात कह रहे हैं, तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और अन्य कानूनी मामलों को भी वापस लिया जाएगा।
अभिजीत दिपके ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि माफी का संदेश स्वागत योग्य हो सकता है, लेकिन इसके साथ कानूनी कार्रवाई को लेकर भी सरकार का रुख साफ होना चाहिए।उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रदर्शन में शामिल युवाओं को वास्तव में “गुमराह बच्चे” मानकर माफ किया जा रहा है, तो क्या उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई भी खत्म की जाएगी या फिर माफी सिर्फ एक भावनात्मक संदेश तक ही सीमित रहेगी।दिपके ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, ताकि छात्रों और उनके परिवारों के बीच बनी अनिश्चितता खत्म हो सके।
पीएम मोदी ने वीडियो में क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर कुछ युवाओं ने उन्हें और उनकी स्वर्गीय मां को लेकर अपशब्द कहे। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा निश्चित रूप से दुख पहुंचाती है, लेकिन वह उन बच्चों से नाराज नहीं हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि “ये गुमराह बच्चे हैं। इन्हें सही रास्ता दिखाना हमारी जिम्मेदारी है। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं।”उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगानी चाहिए और लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
प्रदर्शन के बाद दर्ज हुए थे कई मामले
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद कुछ प्रतिभागियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी और कई लोगों से पूछताछ भी की गई।इन्हीं मामलों का जिक्र करते हुए अभिजीत दिपके ने पूछा है कि यदि प्रधानमंत्री का संदेश क्षमा और संवाद का है, तो क्या सरकार कानूनी स्तर पर भी कोई राहत देने पर विचार करेगी।
सरकार की ओर से नहीं आया कोई आधिकारिक जवाब
फिलहाल केंद्र सरकार या संबंधित जांच एजेंसियों की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने संबंधी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री के बयान का कानूनी प्रक्रिया पर कोई असर पड़ेगा या नहीं।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी एफआईआर या आपराधिक मामले को वापस लेने की अपनी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होती है और केवल राजनीतिक बयान के आधार पर ऐसे मामलों में स्वतः कोई बदलाव नहीं होता।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
प्रधानमंत्री के बयान और अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग प्रधानमंत्री के संदेश को सकारात्मक पहल बताते हुए युवाओं को दूसरा मौका देने की बात कर रहे हैं। वहीं, कुछ का कहना है कि यदि माफी की बात कही जा रही है, तो कानूनी कार्रवाई को लेकर भी सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।दूसरी ओर, कई लोगों का यह भी मानना है कि यदि किसी मामले में कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसका फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए।
अब सरकार के अगले कदम पर नजर
फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रधानमंत्री का बयान सामने आने के बाद विपक्ष और विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर कोई आधिकारिक फैसला लेती है या कानूनी प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहती है।









