सोशल संवाद / डेस्क : ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का जनसंख्या और बच्चों की संख्या को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। एक बयान में उन्होंने मुस्लिम परिवारों में अधिक बच्चों की संख्या को सामान्य बताते हुए हिंदू परिवारों में कम बच्चों को लेकर सवाल उठाया।
यह भी पढ़े : घायल भारतीय पायलट स्मित माछर को नेतन्याहू का न्योता, PM मोदी भी बुलाए गए
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मुस्लिम परिवारों में पांच से अधिक बच्चों का होना असामान्य नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई परिवारों में छह, आठ, दस या उससे अधिक बच्चे भी होते हैं। इसी दौरान उन्होंने हिंदू परिवारों को भी अधिक बच्चे पैदा करने की बात कही।
बच्चों की संख्या को लेकर क्या बोले साजिद रशीदी?
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि मुस्लिम परिवारों में पांच से ज्यादा बच्चे होना सामान्य बात है। उन्होंने छह बच्चों की संख्या को लेकर कहा कि यह उनके लिए आखिरी आंकड़ा है और कुछ परिवारों में बच्चों की संख्या इससे भी अधिक होती है।
उन्होंने हिंदू परिवारों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें भी कम से कम दस बच्चों की संख्या तक पहुंचना चाहिए। उनके इस बयान के बाद जनसंख्या और परिवार के आकार को लेकर बहस तेज हो गई है।
RSS और हिंदू धर्मगुरुओं के बयानों का किया जिक्र
अपने बयान में साजिद रशीदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और कुछ हिंदू धर्मगुरुओं के कथित पुराने बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अतीत में हिंदू समाज को अधिक बच्चे पैदा करने की सलाह दिए जाने की बातें सामने आती रही हैं।
उन्होंने इसी संदर्भ में मुस्लिम परिवारों को ‘बच्चे पैदा करने की मशीन’ कहे जाने वाली टिप्पणियों पर भी सवाल उठाया। रशीदी ने कहा कि अगर मुस्लिम महिलाओं के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, तो फिर महिलाओं को केवल बच्चे पैदा करने वाली मशीन के तौर पर देखना उचित नहीं है।
नसबंदी और बच्चों के जन्म पर भी रखी राय
मौलाना साजिद रशीदी ने नसबंदी और बच्चों के जन्म को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस्लाम में बच्चे के जन्म को रोकने की बात स्वीकार नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि किस बच्चे का जन्म होना है, यह ऊपर वाला तय करता है।
इस दौरान उन्होंने अपने पड़ोस के एक हिंदू परिवार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया कि नसबंदी के बाद भी उस परिवार में बच्चे हुए और जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ। हालांकि, यह उनके द्वारा दिया गया व्यक्तिगत उदाहरण और दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है।
जनसंख्या पर बयान से फिर छिड़ी बहस
मौलाना साजिद रशीदी के इस बयान ने भारत में जनसंख्या, परिवार नियोजन और अलग-अलग समुदायों में बच्चों की संख्या को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। उनके बयान के अलग-अलग हिस्सों पर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते समय समुदायों के बीच तुलना के बजाय आधिकारिक जनसांख्यिकीय आंकड़ों और परिवार नियोजन से जुड़े प्रमाणित तथ्यों को आधार बनाना महत्वपूर्ण है।











