सोशल संवाद / डेस्क : अगर आप बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से कफ सीरप या अन्य सिरप वाली दवाएं खरीदते हैं, तो अब ऐसा करना आसान नहीं होगा। केंद्र सरकार ने दवा बिक्री से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसके बाद कफ सीरप समेत कई सिरप आधारित दवाएं अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना नहीं मिलेंगी।
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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को एक नोटिफिकेशन जारी कर इस बदलाव की जानकारी दी। यह संशोधन ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ में ‘ड्रग्स (पांचवां संशोधन) रूल्स, 2026’ के तहत किया गया है।
सरकार ने नियमों में क्या बदलाव किया?
सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची K (Schedule K) में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इसके तहत सीरियल नंबर 13 के आइटम नंबर (7) से ‘Syrups’ यानी ‘सीरप’ शब्द को हटा दिया गया है। अब तक कुछ शर्तों के तहत सिरप वाली दवाओं को विशेष छूट प्राप्त थी, लेकिन नए संशोधन के बाद ये दवाएं सामान्य नियामकीय नियमों के दायरे में आ जाएंगी। इसका मतलब है कि इन दवाओं की बिक्री और वितरण पर अधिक निगरानी रखी जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के अनुसार, दवाओं के गलत इस्तेमाल और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा सेवन को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दवाओं के दुरुपयोग पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के बाद लागू हुआ नियम
इस बदलाव से पहले केंद्र सरकार ने 29 दिसंबर 2025 को एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया था। इसमें आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई थीं। मंत्रालय ने बताया कि प्राप्त सभी सुझावों और टिप्पणियों पर विचार करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की गई है।
नोटिफिकेशन में क्या कहा गया?
जारी अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने ‘ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ से सलाह-मशविरा करने के बाद यह संशोधन किया है। नियमों के अनुसार, अब शेड्यूल K के अंतर्गत आने वाली दवाओं की सूची से ‘सीरप’ शब्द को हटाया जाएगा, जिससे ऐसी दवाएं पहले की तुलना में अधिक सख्त नियमन के तहत आएंगी।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
इस नए नियम के लागू होने के बाद कफ सीरप और अन्य सिरप आधारित दवाएं खरीदने के लिए डॉक्टर की पर्ची दिखानी पड़ सकती है। इससे बिना जरूरत दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगेगी और मरीजों को सही चिकित्सकीय सलाह मिलने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देगा और सेल्फ-मेडिकेशन की बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएगा।









