सोशल संवाद / रांची : झारखंड पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए लंबे समय से फरार नक्सली रविंद्र गंझू को लातेहार के हेसला गांव से गिरफ्तार कर लिया। उस पर झारखंड सरकार ने 15 लाख और एनआईए ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से एके-56 राइफल और पिस्टल बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है।

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संगठन में रीजनल कमांडर रहा रविंद्र गंझू 154 मामलों में वांछित था। वह मुख्य रूप से लोहरदगा, लातेहार और गुमला के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहा तथा पुलिसकर्मियों की हत्या और लेवी वसूली समेत कई गंभीर मामलों का आरोपी है। वह एनआईए के दो मामलों में भी फरार था। मई में रांची की एनआईए अदालत ने उसे 30 दिन में सरेंडर या अदालत में पेश होने का आदेश दिया था।
ऐसा नहीं करने पर उसकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा और सजा की प्रक्रिया शुरू करने की चेतावनी दी गई थी। पुलिस के अनुसार, संगठन में रविंद्र गंझूरीजनल कमांडर के साथ सैन्य चीफ की भूमिका में भी था। पहले गिरफ्तार जोनल कमांडर रंथू उरांव ने बताया था कि उसके पास रेडियो इंटरसेप्टर था, जिससे वह पुलिस के वायरलेस संदेश सुन सुरक्षाबलों की गतिविधि जान लेता था। एक समय उसके दस्ते में 21 से अधिक नक्सली थे, पर पुलिस दबाव से दस्ता बिखर गया।
शाह के दौरे से पूर्व 4 जवानों की हत्या करने का भी आरोप
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, रविंद्र गंझू पर 22 नवंबर 2019 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चंदवा में चुनावी सभा के दौरान लुकैया मोड़ के पास पुलिस गश्ती दल पर हमले की साजिश रचने का आरोप है। इस हमले में चार पुलिसकर्मी मारे गए थे और नक्सली उनके हथियार लूटकर फरार हो गए थे।










