सोशल संवाद/डेस्क : ऑनलाइन ठगी पर रोक लगाने के लिए आरबीआई नए वित्त वर्ष से बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इसके तहत अब ऑनलाइन लेनदेन और भुगतान को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए दोहरा सत्यापन (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) और पुख्ता हो जाएगा। इसमें पहला सत्यापन पासवर्ड अथवा पिन से होगा, जबकि दूसरे सत्यापन के लिए ग्राहकों को ओटीपी समेत चार अन्य विकल्प मिलेंगे, जिनमें से एक का चयन करना होगा।
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आरबीआई ने हाल ही में डिजिटल लेनदेन के लिए नए सुरक्षा मानक जारी किए हैं। इसके अनुसार, सभी भुगतान सत्यापन के लिए कई विकल्प एमएफए) अनिवार्य कर दिए गए हैं। वर्तमान में अधिकांश लेनदेन दोहरे सत्यापन पर आधारित हैं। इनमें से एक पासवर्ड / पिन और एक एसएमएस आधारित ओटीपी का उपयोग होता है। लेकिन अब बदलाव कर दिया गया है। इसका मतलब है कि हर ऑनलाइन भुगतान में दो सुरक्षा स्तर होंगे।
ऐसे काम करेगी नई प्रणाली
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रणाली पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी। हर लेनदेन के दौरान उपयोगकर्ता के फोन उपकरण, लोकेशन और खर्च के तरीके को ध्यान में रखा जा सकता है। यदि कोई लेनदेन संदिग्ध लगता है या बड़ी राशि का है तो प्रणाली खुद ही अतिरिक्त सत्यापन करने को कहेगी। लेनदेन को तभी मंजूरी मिलेगी, जब सभी सुरक्षा मानक सही पाए जाएंगे।
बैंक की जिम्मेदारी
नए मानकों के अनुसार, यदि कोई बैंक इन नए सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करता और ग्राहक के साथ धोखाधड़ी होती है तो उसकी पूरी वित्तीय जिम्मेदारी बैंक की होगी। हालांकि, आरबीआई ने बैंकों को यह छूट दी है कि वे अपने हिसाब से इस दोहरी सुरक्षा का स्तर तैयार कर सकते हैं।









