सोशल संवाद /नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने विकासपुरी स्थित एक निजी स्कूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। शिक्षा निदेशालय (DoE) के औचक निरीक्षण में स्कूल में सुरक्षा, प्रशासन और वित्तीय नियमों से जुड़ी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में खुलासा हुआ कि स्कूल फायर एनओसी के बिना 43 कक्षाओं का संचालन कर रहा था, जिससे हजारों छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शिक्षा निदेशालय ने स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो सरकार दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के तहत स्कूल के प्रबंधन का अधिग्रहण करने की कार्रवाई कर सकती है।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि स्कूल के पास केवल 39 कमरों के लिए फायर एनओसी थी, जबकि परिसर में कुल 82 कक्षाओं का संचालन किया जा रहा था। यानी 43 कक्षाएं बिना अग्नि सुरक्षा स्वीकृति के संचालित हो रही थीं। इसके अलावा स्कूल परिसर में बिना अनुमति 30 कमरों का टिन शेड, एक अवैध बेसमेंट और तीसरी मंजिल का निर्माण भी किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि कई जगहों पर आपातकालीन निकासी मार्ग बाधित थे, जिससे किसी दुर्घटना की स्थिति में बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।
जांच के दौरान स्कूल परिसर में बिना अनुमति बोरवेल संचालित किया जाना भी सामने आया, जो पर्यावरणीय नियमों और एनजीटी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। इसके साथ ही स्कूल की वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की मान्यता 31 मार्च 2023 को समाप्त होने के बावजूद पिछले तीन वर्षों से वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं का संचालन जारी रखा गया।
शिक्षा निदेशालय की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। स्कूल पर बिना अनुमति कई बार फीस बढ़ाने, कोविड-19 के दौरान भी अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने और
‘स्मार्ट क्लासरूम शुल्क’ के नाम पर मनमानी वसूली करने का आरोप है। वहीं, शिक्षकों को सरकारी वेतनमान के अनुरूप वेतन नहीं देने और कई मामलों में महीनों तक वेतन लंबित रखने की बात भी जांच में सामने आई है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि “दिल्ली सरकार बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। यदि कोई स्कूल कानूनों का उल्लंघन कर छात्रों की जान को खतरे में डालता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर सरकार स्कूल का अधिग्रहण करने से भी पीछे नहीं हटेगी।”
फिलहाल स्कूल प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिनों का समय दिया गया है। जवाब मिलने के बाद शिक्षा निदेशालय पूरे मामले की समीक्षा करेगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकार स्कूल का अधिग्रहण करने के साथ-साथ दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को स्कूल की लीज रद्द करने की भी सिफारिश कर सकती है।









