सोशल संवाद / डेस्क : Meta Copyright Rules Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta और केंद्र सरकार से एक जनहित याचिका (PIL) पर जवाब मांगा है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि Meta के कॉपीराइट नियमों का गलत इस्तेमाल कर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को परेशान किया जा रहा है।
यह भी पढे : Assam Flood Crisis: बाढ़ में मौत का आंकड़ा बढ़ा, CM हिमंत बिस्वा सरमा ने किया राहत पैकेज का ऐलान
याचिका में दावा किया गया है कि कुछ लोग Instagram के कॉपीराइट स्ट्राइक सिस्टम का दुरुपयोग कर रहे हैं। गलत कॉपीराइट शिकायतों के जरिए कंटेंट क्रिएटर्स के अकाउंट बंद कराने या उनसे पैसे वसूलने की कोशिश की जा रही है।
Meta के Copyright Mechanism पर उठे सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर इस PIL में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर नितिन जोशी ने आरोप लगाया है कि Meta का ऑटोमेटेड कॉपीराइट सिस्टम कई बार गलत शिकायतों को भी स्वीकार कर लेता है। इससे क्रिएटर्स के Instagram अकाउंट और उनके काम पर असर पड़ता है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि फर्जी कॉपीराइट दावों के जरिए कुछ लोग डिजिटल क्रिएटर्स को धमकाने और आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, Meta Platforms और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट इस मामले में यह देख रहा है कि कॉपीराइट शिकायतों की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
डिजिटल क्रिएटर्स के लिए बड़ा मुद्दा
आज के समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कई लोगों के लिए कमाई और रोजगार का माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में अकाउंट सस्पेंड होने या कंटेंट हटाए जाने से क्रिएटर्स को बड़ा नुकसान हो सकता है। इस मामले ने सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी और कॉपीराइट नियमों की निष्पक्षता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
Meta Copyright Case पर आगे की नजर
दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही इस सुनवाई से यह तय हो सकता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कॉपीराइट शिकायतों की जांच और कार्रवाई का तरीका कितना पारदर्शी होना चाहिए।









