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दिल्ली प्रदूषण से विज्ञान व साक्ष्य के साथ जंग, हर कदम का असर हवा की गुणवत्ता में दिखेगा : मनजिंदर सिंह सिरसा

By Riya Kumari

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दिल्ली
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सोशल संवाद / नई दिल्ली : माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक व्यापक, साल-भर चलने वाली रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत प्रशासनिक समन्वय को केंद्र में रखा गया है।

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इसी दिशा में दिल्ली सरकार, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर के साथ सहयोग की संभावना तलाश रही है, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एयर क्वालिटी इंटेलिजेंस और डेटा के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के समाधानों को लागू किया जा सके। इस प्रस्तावित सहयोग को लेकर पर्यावरण विभाग द्वारा कार्ययोजना, संस्थागत ढांचे और चरणबद्ध क्रियान्वयन पर मंथन किया जा रहा है।

इस पहल पर बताते हुए पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा,

“माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दिल्ली की प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई वैज्ञानिक और रणनीतिक हो। अब निर्णय रियल-टाइम डेटा, प्रदूषण स्रोतों की सटीक पहचान और मापनीय परिणामों के आधार पर लिए जाएंगे।”

प्रस्तावित सहयोग का उद्देश्य प्रदूषण के स्रोतों की सूक्ष्म स्तर पर पहचान, उनके प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन और विभिन्न क्षेत्रों में लक्षित व समयबद्ध कार्रवाई को सक्षम बनाना है। इसके तहत ऐसे सिस्टम विकसित किए जाएंगे जो निरंतर मॉनिटरिंग, विश्लेषण, पूर्वानुमान और कार्रवाई को दिशा दे सकें।

मंत्री ने आगे कहा,

“प्रदूषण नियंत्रण कोई मौसमी अभियान नहीं हो सकता। दिल्ली को 365 दिनों का ऐसा एक्शन फ्रेमवर्क चाहिए जिसमें तकनीक, शासन और प्रवर्तन पूरी तरह समन्वित हों और हर निर्णय डेटा-आधारित हो।”

इस रणनीति का एक प्रमुख आधार डायनामिक सोर्स अपॉर्शनमेंट है, जिसके माध्यम से धूल, परिवहन, उद्योग, बायोमास जलाने और क्षेत्रीय कारकों से होने वाले प्रदूषण का वैज्ञानिक निर्धारण किया जाएगा। इससे एजेंसियां सामान्य प्रतिबंधों की बजाय सीधे प्रदूषण के मूल कारणों पर कार्रवाई कर सकेंगी।

प्रस्तावित मॉडल में बहु-एजेंसी समन्वय पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है, ताकि नगर निगम, जिला प्रशासन, प्रवर्तन एजेंसियां और तकनीकी संस्थान एक साझा डेटा प्लेटफॉर्म पर काम करें, जहां जिम्मेदारियां स्पष्ट हों और जवाबदेही तय हो।

“जब सभी एजेंसियां एक ही वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर काम करती हैं, तो कार्रवाई तेज़, सटीक और प्रभावी होती है। हमारा लक्ष्य दिल्ली को ‘फायरफाइटिंग’ से निकालकर वास्तविक रोकथाम की ओर ले जाना है,” सिरसा ने कहा।

दिल्ली सरकार फिलहाल चार प्रमुख मोर्चों – व्हीकुलर एमिशन, धूल नियंत्रण, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग और कचरा प्रबंधन – पर एक साथ सख्त कार्रवाई कर रही है।

निर्माण स्थलों पर कड़े डस्ट नॉर्म्स, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, एंटी-स्मॉग गन्स और इलेक्ट्रिक पोल्स पर मिस्ट स्प्रे सिस्टम के ज़रिये हवा में उड़ने वाले कणों को नियंत्रित किया जा रहा है। जिला मजिस्ट्रेट और डिविजनल कमिश्नर के नेतृत्व में सर्वे के माध्यम से प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सीलिंग और बंदी की कार्रवाई जारी है। वहीं, सभी लैंडफिल साइट्स पर बायो-माइनिंग के ज़रिये प्रतिदिन लगभग 35 मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का निपटान किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार ने दोहराया कि वह देश-दुनिया की सर्वोत्तम वैज्ञानिक विशेषज्ञता को अपनाने, संस्थागत क्षमता को मज़बूत करने और एक मज़बूत निर्णय-समर्थन ढांचा विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि नागरिकों को हर साल स्वच्छ हवा सुनिश्चित की जा सके। सहयोग से जुड़े विस्तृत विवरण औपचारिक विचार-विमर्श के बाद साझा किए जाएंगे।

पिछले 24 घंटों में की गई कार्रवाई

निर्माण एवं विध्वंस (C&D) स्थल

•500 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाले C&D साइट्स का भौतिक निरीक्षण: 250

• 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले C&D साइट्स का निरीक्षण: 92

सड़क धूल नियंत्रण उपाय

• मैकेनिकल स्वीपिंग: 6,291 किमी

• पानी का छिड़काव: 1,694 किमी

• एंटी-स्मॉग गन्स की संख्या: 405

• हटाया गया कचरा: 12,012 मीट्रिक टन

वाहन प्रदूषण नियंत्रण

• प्रदूषण संबंधी चालान: 7,023

यातायात प्रबंधन

• ईस्टर्न व वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से डायवर्ट किए गए गैर-गंतव्य ट्रक: 65

• जाम मुक्त किए गए ट्रैफिक बिंदु: 41

जन-शिकायत निवारण

• मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त व निस्तारित शिकायतें: 58

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