सोशल संवाद / जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी), दांतों के अंदरूनी संक्रमण, कैविटी, नसों की समस्या या जबड़े के फ्रैक्चर की सटीक जांच के लिए अब बाहर नहीं जाना होगा, बल्कि एमजीएम अस्पताल में ही ये इलाज हो सकेंगे। ये सहूलियत अत्याधुनिक डिजिटल इंट्राओरल एक्सरे मशीन लगने के कारण होगी।
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अबतक अस्पताल में इंट्रा ओरल एक्सरे की सुविधा नहीं होने से यहां आने वाले मरीजों को रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी), दांतों के अंदरूनी संक्रमण, कैविटी, नसों की समस्या या जबड़े के फ्रैक्चर की सटीक जांच के लिए बाहर के निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों में जाना पड़ता था। दंत रोग विभाग के डॉ. नितेश कुमार ने बताया कि इस सुविधा से कोल्हान भर के मरीजों को लाभ होगा। डेंटल विभाग में पहली बार अत्याधुनिक डिजिटल इंट्रा ओरल एक्स-रे मशीन और हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल सेंसर यूनिट की स्थापना की गई है। इस नई व्यवस्था के शुरू होने से अब दांतों, मसूड़ों और जबड़े से जुड़ी गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज अस्पताल परिसर में ही सुगमता से हो सकेगा। दंत रोग विभाग में स्थापित यह आधुनिक डिजिटल प्रणाली
अत्याधुनिक सेंसर और कंप्यूटर डिस्प्ले से सुसज्जित है, जो जांच के तुरंत बाद कंप्यूटर स्क्रीन पर दांतों और उनकी जड़ों की बेहद साफ और विस्तृत डिजिटल इमेज प्रस्तुत करती है। इससे डॉक्टरों को जटिल प्रक्रियाओं और माइनर ओरल सर्जरी की योजना बनाने में त्वरित और सटीक निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
एमजीएम अपना 10 बेड का डायलिसिस सेंटर खोलेगा
एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जल्द ही अपना डायलिसिस सेंटर शुरू हो सकता है। इसके लिए सेंटर बनाने वाली एजेंसी ने अस्पताल भवन का निरीक्षण कर लिया है। उम्मीद है नवंबर में यह सेंटर तैयार हो जाएगा। अस्पताल में पहले से डायलिसिस सेंटर चल रहा है, जिसे पीपीपी मोड पर एक एजेंसी संचालित कर रही है। इसमें सारा सामान एजेंसी का है और वह मरीजों से शुल्क लेती है, जबकि आयुष्मान कार्ड धारकों को मुफ्त सुविधा मिलती है।
स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर अब एमजीएम अस्पताल अपना 10 बेड का डायलिसिस सेंटर शुरू कर रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई है। एजेंसी 10 मशीन खरीदकर इंस्टॉल करेगी और आरओ वाटर फिल्टर प्लांट लगाएगी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन व्यवस्था के अनुसार इसे चलाएगा। कर्मचारी और तकनीशियन की व्यवस्था भी एमजीएम करेगा। यहां सबर और बीपीएस मरीजों का मुफ्त में डायलिसिस होगा, जबकि आम मरीजों के लिए बाजार से सस्ते दरों पर सुविधा उपलब्ध होगी। यह पहला सरकारी अस्पताल होगा, जिसके पास अपनी मशीनें होंगी। सदर अस्पताल में चार बेड का डायलिसिस सेंटर चल रहा है।











