सोशल संवाद/राँची : झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि केवल संदेह और सामान्य आरोपों के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता। अदालत ने पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है।
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हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि व्यभिचार जैसे गंभीर आरोपों के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं। पति ने पत्नी पर अवैध संबंध, क्रूरता और परित्याग के आरोप लगाए थे, लेकिन उनके समर्थन में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण या दस्तावेज पेश नहीं किए गए। कॉल डिटेल्स या अन्य साक्ष्य भी अदालत के सामने नहीं रखे गए।
अदालत ने कहा कि वैवाहिक जीवन में सामान्य मतभेद या झगड़े को क्रूरता नहीं माना जा सकता। पत्नी के घर छोड़ने की घटना को भी विधिक रूप से परित्याग साबित करने योग्य नहीं पाया गया, क्योंकि इसके आवश्यक कानूनी तत्व सिद्ध नहीं हुए। कोर्ट ने माना कि परिवार न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया है और उसके फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।










