सोशल संवाद / डेस्क : ब्रेन हैमरेज स्ट्रोक का एक बेहद गंभीर और जानलेवा रूप माना जाता है। इसमें दिमाग की किसी ब्लड वेसल के फटने या लीक होने से अंदरूनी रक्तस्राव शुरू हो जाता है। इस स्थिति में ब्रेन सेल्स तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषण नहीं पहुंच पाता, जिससे स्थायी ब्रेन डैमेज या जान का खतरा बढ़ जाता है। ब्रेन हैमरेज एक मेडिकल इमरजेंसी है, इसलिए समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। थोड़ी सी देरी भी स्थिति को गंभीर बना सकती है।

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ब्रेन हैमरेज कैसे होता है?
जब दिमाग की कोई नस फटती है, तो खून आसपास के ब्रेन टिश्यू में फैल जाता है। इससे सूजन, ब्लड क्लॉट और दिमाग पर दबाव बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ दबाव ब्रेन के जरूरी फंक्शन जैसे बोलना, चलना, याददाश्त और चेतना को प्रभावित कर सकता है।
खोपड़ी की भूमिका क्यों अहम है?
खोपड़ी एक कठोर ढांचा होती है, जिसमें दिमाग के लिए अतिरिक्त जगह नहीं होती। ऐसे में जब खून या सूजन बढ़ती है, तो दबाव सीधे ब्रेन पर पड़ता है। इससे ब्लड फ्लो कम हो सकता है और ब्रेन डैमेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

ब्रेन हैमरेज के प्रकार
रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेन हैमरेज को उसके स्थान के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जाता है:
- एपिड्यूरल हैमरेज: खोपड़ी और दिमाग की बाहरी परत के बीच, आमतौर पर सिर की चोट से।
- सबड्यूरल हैमरेज: दिमाग की परतों के बीच, जो अचानक या धीरे-धीरे विकसित हो सकता है, खासकर बुजुर्गों में।
- सबअरेक्नॉइड हैमरेज: अचानक तेज सिरदर्द के साथ, अक्सर एन्यूरिज़्म या गंभीर चोट के कारण।
- इंट्रासेरेब्रल हैमरेज: सीधे दिमाग के टिश्यू में, जो अक्सर हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा होता है।
- इंट्रावेंट्रिकुलर हैमरेज: दिमाग की अंदरूनी कैविटी में खून बहना।
ब्रेन हैमरेज के कारण
50 साल से कम उम्र के लोगों में सिर की गंभीर चोट एक प्रमुख कारण है। वहीं लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर नसों को कमजोर कर देता है, जिससे उनके फटने का खतरा रहता है। इसके अलावा एन्यूरिज़्म, ब्लड डिसऑर्डर और कुछ दवाएं भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
ब्रेन हैमरेज के शुरुआती लक्षण
- अचानक बहुत तेज सिरदर्द
- दौरे या बेहोशी
- नजर धुंधली होना
- हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन
- बोलने या समझने में दिक्कत
इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है।
जांच और इलाज
ब्रेन हैमरेज की पुष्टि के लिए CT स्कैन और MRI किए जाते हैं। इलाज में ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करना, दौरे रोकने की दवाएं देना और गंभीर मामलों में सर्जरी शामिल होती है।
रिकवरी और बचाव
ब्रेन हैमरेज के बाद याददाश्त, ध्यान और व्यवहार पर असर पड़ सकता है। फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और नियमित रिहैबिलिटेशन से रिकवरी बेहतर हो सकती है। बचाव के लिए हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, नियमित व्यायाम और हेल्दी डाइट अपनाना बेहद जरूरी है।










