सोशल संवाद/डेस्क : अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप एक बार फिर गंभीर होता जा रहा है। देश में संक्रमण के 3,200 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद यह दुनिया के सबसे बड़े इबोला प्रकोपों में शामिल हो गया है। लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच राहत की उम्मीद भी जगी है, क्योंकि ब्रिटेन (UK) में इस वायरस के खिलाफ नई वैक्सीन का पहला क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया गया है।
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हालात क्यों चिंताजनक हैं?
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, DRC के कई इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र इटुरी प्रांत है, जहां नए मरीज लगातार मिल रहे हैं। अब तक 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कई गांव ऐसे हैं जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं, जिससे मरीजों की समय पर पहचान और इलाज करना चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ संक्रमित ऐसे भी मिले हैं, जिनका पहले से संक्रमित मरीजों से कोई स्पष्ट संपर्क नहीं मिला। इससे वायरस के सामुदायिक स्तर पर फैलने की आशंका और बढ़ गई है।
UK में शुरू हुआ वैक्सीन ट्रायल
इबोला से लड़ाई में एक अच्छी खबर भी सामने आई है। ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप ने Bundibugyo स्ट्रेन के खिलाफ नई वैक्सीन का फेज-1 क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया है। इस ट्रायल में करीब 50 स्वस्थ स्वयंसेवकों को शामिल किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि शुरुआती परीक्षण सफल रहते हैं, तो आगे बड़े स्तर पर इसका परीक्षण किया जाएगा। यह वैक्सीन उसी आधुनिक तकनीक पर आधारित है, जिसका उपयोग कोविड-19 वैक्सीन के विकास में भी किया गया था।
इबोला क्या है और कैसे फैलता है?
इबोला एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संक्रमित वस्तुओं के सीधे संपर्क से फैलती है। यह वायरस हवा के जरिए नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित मरीज की देखभाल के दौरान सावधानी नहीं बरतने पर संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, उल्टी और दस्त शामिल हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को अंदरूनी या बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है।
दुनिया की नजर DRC पर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) समेत कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है, संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दुनिया के दूसरे देशों के लिए बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन अफ्रीका के प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण को जल्द नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो यह और अधिक लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है।









