सोशल संवाद / डेस्क : एक समय था जब हर माता-पिता का सपना होता था कि उनका बच्चा पढ़-लिखकर डॉक्टर या इंजीनियर बने। लेकिन नया साल 2026 शिक्षा जगत में बड़ा बदलाव लेकर आया है। वर्षों से सुपरहिट रहे कई कोर्सेज की डिमांड अब धीरे-धीरे घटती नजर आ रही है।

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आज के स्टूडेंट्स भीड़ का हिस्सा बनना नहीं चाहते। वे अपनी पहचान खुद बनाना चाहते हैं और इसी सोच के चलते जो कोर्सेज कल तक सबसे ज्यादा पसंद किए जाते थे, वे अब आउट ऑफ ट्रेंड होते जा रहे हैं।
2026 में क्यों घट रही है पारंपरिक इंजीनियरिंग की डिमांड?
कभी सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को सदाबहार कोर्स माना जाता था। कॉलेजों की लाइब्रेरी और लैब्स में इन ब्रांचों के लिए लंबी कतारें लगती थीं। लेकिन 2026 में इन क्षेत्रों की डिमांड में लगातार गिरावट देखी जा रही है।
इसके पीछे प्रमुख कारण:
- पारंपरिक इंजीनियरिंग में नौकरी के मौके सीमित
- सैलरी ग्रोथ धीमी
- इंडस्ट्री की जरूरतों से कोर्सेज का तालमेल कमजोर
इसी वजह से छात्र अब कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल मार्केटिंग जैसे फील्ड्स की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
जनरल डिग्री नहीं, अब स्पेशलाइजेशन की मांग
सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि बीए और बीकॉम जैसे जनरल कोर्सेज की लोकप्रियता भी कम हो रही है।
Gen Z स्टूडेंट्स अब सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहना चाहते, वे स्किल-बेस्ड और जॉब-ओरिएंटेड पढ़ाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अब ज्यादा पसंद किए जा रहे कोर्स:
- B.Com (Honours)
- Digital Marketing
- Financial Analytics
- Data Analysis
- Business Intelligence
यानी 2026 में जनरलिस्ट से ज्यादा स्पेशलिस्ट की डिमांड है।
टीचिंग कोर्सेज से भी बना रहे छात्र दूरी
B.Ed और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण कोर्सेज में भी छात्रों की रुचि लगातार घट रही है।
इसके पीछे कई अहम वजहें हैं:
- सरकारी भर्तियों में देरी
- निजी स्कूलों में कम सैलरी
- करियर ग्रोथ के सीमित अवसर
आज के युवा टीचिंग के बजाय Ed-Tech, Content Creation, Corporate Training और Online Coaching जैसे विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जहां बेहतर पैकेज और वर्क-लाइफ बैलेंस मिलता है।
AI और डिजिटल युग ने बदला एजुकेशन ट्रेंड
कई पारंपरिक कोर्स आज भी डिजिटल युग और आधुनिक तकनीक के हिसाब से अपडेट नहीं हुए हैं।
वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक नौकरियों के लिए खतरा बनता जा रहा है।
अब कंपनियां:
- सिर्फ डिग्री नहीं
- बल्कि स्किल्स, प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल नॉलेज को महत्व दे रही हैं
युवा भी 9 से 5 की नौकरी के बजाय रिमोट वर्क और फ्रीलांसिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
2026: शिक्षा जगत की बड़ी करवट
2026 का यह बदलाव कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की बड़ी करवट है।
अब छात्र वही कोर्स चुनेंगे:
- जो उन्हें Future-Ready बनाए
- जो उन्हें Job-Ready स्किल्स सिखाए
- जो कोर्स सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित रहेंगे, उनकी चमक आने वाले समय में और फीकी पड़ती जाएगी।
FAQ
Q1. 2026 में कौन से कोर्सेज आउट ऑफ ट्रेंड हो रहे हैं?
सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सामान्य बीए, बीकॉम और बीएड जैसे कोर्सेज की डिमांड 2026 में घटती नजर आ रही है।
Q2. 2026 में स्टूडेंट्स किन कोर्सेज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं?
कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मार्केटिंग, फाइनेंशियल एनालिटिक्स जैसे कोर्सेज की मांग बढ़ रही है।
Q3. क्या डिग्री से ज्यादा स्किल्स जरूरी हो गई हैं?
हां, अब कंपनियां डिग्री के साथ-साथ स्किल्स, प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल नॉलेज को ज्यादा महत्व दे रही हैं।
Q4. Gen Z स्टूडेंट्स पारंपरिक करियर से क्यों हट रहे हैं?
कम सैलरी ग्रोथ, सीमित नौकरियां और डिजिटल युग की जरूरतों के कारण Gen Z फ्यूचर-रेडी और फ्लेक्सिबल करियर चुन रही है।










