सोशल संवाद / डेस्क : अगर किसी के मैसेज पर आपको हंसी आती है, तो अब “हाहा” लिखने की जरूरत नहीं होती। एक छोटा-सा इमोजी ही सामने वाले को बता देता है कि उसका मैसेज आपको कितना पसंद आया। आज इमोजी सिर्फ हंसी या स्माइल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जेंडर, स्किन टोन और भावनाओं के सैकड़ों विकल्पों के साथ करीब 4,000 से ज्यादा इमोजी डिजिटल बातचीत का हिस्सा बन चुकी हैं।
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लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इमोजी बनती कैसे हैं, इन्हें कौन डिजाइन करता है और आखिर कौन तय करता है कि कौन-सी इमोजी आएगी? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
इमोजी क्या होती है और इसकी शुरुआत कब हुई?
इमोजी एक स्टैंडर्ड डिजिटल सिंबल या आइकन होती है, जिसका इस्तेमाल मैसेज, सोशल मीडिया और ईमेल में भावनाएं, विचार या चीजें दिखाने के लिए किया जाता है।
“Emoji” शब्द जापानी भाषा से आया है
- E = तस्वीर
- Mo = लिखना
- Ji = कैरेक्टर
सबसे पहली इमोजी जापान के ग्राफिक डिजाइनर शिगेताका कुरिता ने बनाई थी। उनका 176 इमोजी का मूल सेट आज न्यूयॉर्क के मॉडर्न आर्ट म्यूजियम (MoMA) में सुरक्षित है। स्मार्टफोन आने के बाद इमोजी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गईं और आज लगभग 92% इंटरनेट यूजर्स इमोजी का इस्तेमाल करते हैं।
इमोजी कैसे बनती है? पूरी प्रक्रिया समझिए
दिखने में भले ही इमोजी तस्वीर जैसी लगती हों, लेकिन असल में ये Unicode कोड पॉइंट्स पर आधारित होती हैं।
कोई भी व्यक्ति नई इमोजी का सुझाव दे सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें होती हैं, जैसे:
- क्या इमोजी छोटे साइज में भी समझ आएगी?
- क्या यह पहले से मौजूद इमोजी से अलग और उपयोगी है?
- क्या लोग पहले से इस कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं?
प्रस्ताव के साथ इमोजी का नाम, कैटेगरी, कीवर्ड्स और उपयोग का कारण Unicode Consortium को भेजना होता है।
इमोजी को अप्रूव कौन करता है?
नई इमोजी को मंजूरी देने का काम Unicode Consortium करता है। यह अमेरिका स्थित एक नॉन-प्रॉफिट संगठन है, जिसमें टेक कंपनियों, भाषा विशेषज्ञों और डिजाइनर्स की टीम शामिल होती है।
यही संस्था तय करती है कि कौन-सी इमोजी दुनिया भर के डिवाइस में आएगी।
अप्रूवल के बाद क्या होता है?
एक बार इमोजी को यूनिकोड अप्रूवल मिल जाने के बाद:
- Apple, Google, Samsung जैसे ब्रांड
- उसी इमोजी को अपने-अपने डिजाइन स्टाइल में तैयार करते हैं
इसी वजह से एक ही इमोजी iPhone और Android पर थोड़ी अलग दिखती है।
इमोजी से जुड़े विवाद भी आए सामने
2017 में बर्गर इमोजी को लेकर बड़ा विवाद हुआ था।
Google की बर्गर इमोजी में चीज ऊपर थी, जबकि Apple की इमोजी में चीज नीचे।
यह मुद्दा इतना वायरल हुआ कि खुद Google CEO सुंदर पिचाई को इस पर प्रतिक्रिया देनी पड़ी।
इमोजी का भविष्य क्या है?
डिजिटल बातचीत में इमोजी अब भाषा का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इमोजी ने ग्लोबल कम्युनिकेशन को ज्यादा आसान और इमोशनल बना दिया है। आने वाले समय में और ज्यादा इनक्लूसिव, कल्चर-स्पेसिफिक और एक्सप्रेसिव इमोजी देखने को मिल सकती हैं।
इमोजी सिर्फ छोटे आइकन नहीं, बल्कि एक ग्लोबल डिजिटल भाषा हैं। बिना शब्दों के अपनी बात कहना हो, तो इमोजी आज सबसे ताकतवर माध्यम बन चुकी हैं।










