सोशल संवाद / बड़बिल: जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों की मासिक वर्चुअल बैठक हाल ही में संपन्न हुई। बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने हिस्सा लिया और पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
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जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया की केंदुझर जिला इकाई के सदस्य टंकाधर पात्रो और संजय सिन्हा ने बताया कि बैठक में पत्रकारों की मौजूदा स्थिति, उनके अधिकारों और पत्रकारिता के सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि आज पत्रकारिता एक विषम दौर से गुजर रही है। जो पत्रकार अपना काम करते हुए खबरें सामने लाता है, कई बार वही व्यक्ति परेशानी और आरोपों का सामना करता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता मूल रूप से जनसेवा का कार्य है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों से पत्रकारों के शोषण और उनके अधिकारों के हनन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न वर्गों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों का आंकड़ा उपलब्ध है, लेकिन पत्रकारों की वास्तविक संख्या को लेकर न तो सरकार के पास कोई आधिकारिक डेटा है, न संगठनों के पास और न ही स्वयं पत्रकारों के पास। इसके पीछे एक प्रमुख कारण पत्रकारों का बिखरा होना है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि बिखरा हुआ मीडिया अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद कई बार अपने अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाता। ऐसे में अब समय आ गया है कि पत्रकार अपने अधिकारों और अपनी आवाज को मजबूती से उठाने के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की एकजुटता ही उनकी ताकत बनेगी।










