सोशल संवाद/डेस्क : भारत के लोकप्रिय मसाला ब्रांड Everest Spices हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। कुछ लैब टेस्ट से जुड़े दावों के सामने आने के बाद कंपनी के कुछ मसाला उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

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वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद
यह मामला तब सामने आया जब एक यूट्यूब चैनल ने वीडियो जारी कर दावा किया कि Everest के कुछ मसाला उत्पाद प्रयोगशाला जांच में तय सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे। बताया गया कि मसालों के सैंपल बाजार से खरीदकर लैब में टेस्ट के लिए भेजे गए थे।
रिपोर्ट में जिन मसालों की जांच की बात कही गई, उनमें गरम मसाला, किचन किंग मसाला, कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और मीट मसाला शामिल बताए गए। इन उत्पादों को यह जांचने के लिए परीक्षण किया गया कि क्या वे भारतीय खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं या नहीं।
लैब रिपोर्ट में क्या सामने आया?
वीडियो में साझा किए गए कथित परिणामों के अनुसार कुछ नमूनों में कीटनाशक (पेस्टिसाइड) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक बताई गई। रिपोर्ट में खास तौर पर Acetamiprid और Azoxystrobin नामक कीटनाशकों का जिक्र किया गया।
इसके अलावा कुछ नमूनों में Enterobacteriaceae बैक्टीरिया की मात्रा भी अधिक बताई गई, जो आमतौर पर दूषित खाद्य पदार्थों से जुड़ा होता है। इस परिवार में E. coli और Salmonella जैसे बैक्टीरिया शामिल होते हैं, जो पेट से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
क्यों बढ़ी लोगों की चिंता?
भारत में करोड़ों लोग रोजाना मसालों का उपयोग करते हैं, इसलिए इस तरह के दावों ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा पैदा कर दी। फूड सेफ्टी और मसालों की गुणवत्ता को लेकर लोगों के बीच चिंता भी देखने को मिली।
मसालों में बैक्टीरिया कैसे पहुंच सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार मसालों में बैक्टीरिया की मौजूदगी कई बार प्रोसेसिंग या सफाई की कमी की ओर संकेत कर सकती है। यदि कच्चे मसालों को सही तरीके से साफ या सुखाया न जाए, तो उनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
कंपनी और जांच एजेंसियों की भूमिका
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल दावों से जुड़ा हुआ है और ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष अक्सर आधिकारिक जांच या खाद्य सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आता है। Everest मसालों से जुड़े लैब टेस्ट के दावों ने एक बार फिर फूड सेफ्टी और पैकेज्ड मसालों की गुणवत्ता को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, किसी भी अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार जरूरी माना जा रहा है।









