सोशल संवाद / जमशेदपुर: जमशेदपुर बंद के बाद टेल्को थाना में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा जमशेदपुर महानगर के पूर्व जिलाध्यक्ष गुंजन यादव ने इस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण, पूर्वाग्रह से प्रेरित और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़ा करने वाला बताया है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराने की मांग की है।
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गुंजन यादव ने कहा कि शुक्रवार को आयोजित जमशेदपुर बंद के दौरान या उसके अगले दिन तक किसी भी समाचार पत्र, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या अन्य माध्यमों में तोड़फोड़, आगजनी, जबरन दुकानें बंद कराने अथवा किसी हिंसक घटना की कोई पुष्टि नहीं हुई थी। इसके बावजूद शनिवार शाम मीडिया के जरिए यह जानकारी मिली कि जमशेदपुर अक्षेस के स्ट्रीट लाइट इंस्पेक्टर विश्वजीत मुंडा की शिकायत पर टेल्को मंडल अध्यक्ष विकास शर्मा समेत कई भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ टेल्को थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान जरूरी : गुंजन यादव
पूर्व जिलाध्यक्ष ने कहा कि भारत के लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर जमशेदपुर बंद को सफल बनाने का प्रयास किया था। ऐसे में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने जैसे आरोप कई सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बंद के दौरान संबंधित अधिकारी किस सरकारी कार्य का निर्वहन कर रहे थे, जिसमें कथित रूप से बाधा पहुंचाने की बात कही जा रही है। यदि ऐसी कोई घटना हुई है तो उसके तथ्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
भाजपा कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप
गुंजन यादव ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी राजनीतिक पूर्वाग्रह और विद्वेष की भावना से प्रेरित होकर भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में कहीं भी जबरन बंद कराने या हिंसा की पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने और कार्यकर्ताओं में भय का माहौल बनाने की कोशिश दिखाई देती है, जो स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं है।
निष्पक्ष जांच की मांग
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए, ताकि सत्य सामने आ सके और किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।










