सोशल संवाद / डेस्क : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने देवघर कोषागार (फॉडर स्कैम) मामले में झारखंड हाईकोर्ट द्वारा उनकी सजा निलंबित करने (बेल) के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट को लंबित आपराधिक अपील का निपटारा छह महीने के भीतर करने का निर्देश दिया।
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CBI की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने झारखंड हाईकोर्ट के वर्ष 2019 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबित कर उन्हें राहत दी गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय बाद इस आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार नहीं है।
हाईकोर्ट को छह महीने में फैसला देने का निर्देश
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि लालू प्रसाद यादव की आपराधिक अपील लंबे समय से लंबित है। ऐसे में झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह मामले की सुनवाई तेज करते हुए छह महीने के भीतर अपील पर निर्णय लेने का प्रयास करे।
क्या है देवघर चारा घोटाला मामला?
देवघर कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराया गया था। बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने उस राहत को बरकरार रखते हुए सीबीआई की चुनौती को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
लालू यादव को फिलहाल राहत बरकरार
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद लालू प्रसाद यादव को मिली जमानत और सजा पर रोक फिलहाल जारी रहेगी। अब सभी की नजरें झारखंड हाईकोर्ट पर होंगी, जहां इस मामले की लंबित अपील पर अगले छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी किए जाने की उम्मीद है।










