सोशल संवाद / जमशेदपुर : विधि (लॉ) कॉलेजों में नए सत्र से कानूनी शिक्षा का पाठ्यक्रम पूरी तरह बदल जाएगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार विधि पाठ्यक्रमों में अब व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।
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यूजीसी ने यह महत्वपूर्ण निर्देश नवंबर 2025 में आयोजित महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों के सम्मेलन में की गई सिफारिशों के आधार पर जारी किया है। इस नए बदलाव के तहत अब कानून के विद्यार्थियों को पारंपरिक धाराओं के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और देश की न्याय प्रणाली में आए ऐतिहासिक बदलावों के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा। इस नए पाठ्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण फोरेंसिक विज्ञान (फोरेंसिक साइंस) और आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों का समावेश होगा।
यूजीसी के निर्देशानुसार, विधि के विद्यार्थियों को न्याय प्रणाली में आए इस बदलाव और फोरेंसिक के बढ़ते उपयोग के लाभों का अध्ययन कराना होगा। इसके अलावा भारत में फोरेंसिक क्षेत्र में हुए बदलावों और केस स्टडीज को संकलित कर पाठ्यक्रम में शामिल और प्रकाशित किया जाएगा, ताकि छात्र वास्तविक और व्यावहारिक उदाहरणों से सीख सकें। इस राष्ट्रीय निर्देश के आलोक में कोल्हान विश्वविद्यालय सहित देश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों ने अपने लॉ पाठ्यक्रमों को
अपडेट करने की तैयारिया शुरू कर दी हैं। अब विधि के विद्यार्थियों को अदालती प्रक्रिया के साथ-साथ फोरेंसिक स्टडीज, वैज्ञानिक जांच के तरीकों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण की भी तकनीकी समझ दी जाएगी।
इस बदलाव से न केवल वकालत की पढ़ाई कर रहे छात्रों को आधुनिक युग की कानूनी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि देश की न्याय प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सटीक और मजबूत बनाने वाले नए दौर के विशेषज्ञ वकील और न्यायविद तैयार हो सकेंगे। सभी विश्वविद्यालयों को इन सिफारिशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।









