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बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जीएस पटेल को धमकियां, लंदन में बेटी पर हमला; दाऊदी बोहरा फैसले से जुड़ा मामला

By Riya Kumari

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बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जीएस पटेल को धमकियां, लंदन में बेटी पर हमला; दाऊदी बोहरा फैसले से जुड़ा मामला

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सोशल संवाद / डेस्क : बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस जीएस (गौतम) पटेल और उनके परिवार को पिछले करीब 10 महीनों से लगातार धमकियां मिलने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला दाऊदी बोहरा समुदाय के उत्तराधिकार विवाद पर दिए गए उनके चर्चित फैसले से जुड़ा हुआ है।

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जानकारी के मुताबिक, हाल ही में जस्टिस पटेल की बेटी अदिति पटेल, जो यूनाइटेड किंगडम में रहती हैं, को एक गुमनाम पत्र मिला जिसमें परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। पत्र में कथित तौर पर जस्टिस पटेल से अपने फैसले को सार्वजनिक रूप से वापस लेने की मांग की गई थी।

लंदन में बेटी पर हुआ हमला

रिपोर्ट्स के अनुसार, अप्रैल 2026 में लंदन में जस्टिस पटेल की बेटी पर एक अज्ञात नकाबपोश व्यक्ति ने हमला कर दिया था। इस हमले में उनकी नाक में गंभीर चोट आई। ब्रिटेन की पुलिस और संबंधित एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं।

क्या था दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद?

दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक नेतृत्व को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। अप्रैल 2024 में जस्टिस जीएस पटेल ने अपने फैसले में सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय का वैध 53वां दाई-अल-मुतलक (आध्यात्मिक प्रमुख) माना था। अदालत ने चुनौती देने वाले पक्ष की याचिका खारिज कर दी थी। यह फैसला फिलहाल उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष चुनौती के अधीन है।

फैसले को वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमकी भरे पत्रों में जस्टिस पटेल से कथित तौर पर यह मांग की गई कि वे वीडियो जारी कर अपने फैसले को वापस लें। जस्टिस पटेल ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक फैसले को चुनौती देने का वैधानिक तरीका अपील है, न कि इस प्रकार का दबाव।

न्यायपालिका की सुरक्षा पर उठे सवाल

घटना के बाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जस्टिस पटेल ने चिंता जताई कि यदि न्यायाधीशों और उनके परिवारों को फैसलों के कारण धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़े, तो न्यायिक व्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

इस मामले की जांच भारत और ब्रिटेन की संबंधित एजेंसियां कर रही हैं, जबकि कानूनी जगत में इस घटना को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है।

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