सोशल संवाद / डेस्क : भारत सरकार वाहन फिटनेस और PUC (Pollution Under Control) टेस्ट के नियमों में बड़ा बदलाव कर रही है। अब निजी कार, बाइक और अन्य वाहन भी Automated Testing Stations (ATS) पर टेस्ट करवाएंगे, ठीक वैसे ही जैसे पहले केवल कमर्शियल वाहनों के लिए अनिवार्य था। यह नई व्यवस्था रोड सेफ्टी, फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत बनाने के लिए लाई जा रही है।
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ATS क्या है और क्यों जरूरी है?
ATS यानी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन ऐसे केंद्र हैं जहां मशीनों के ज़रिए पूरी फिटनेस जांच होती है, बिना इंसानी हस्तक्षेप के। इस तकनीक से धोखाधड़ी, फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट और पुराने गलत परीक्षणों पर रोक लगेगी।
नई नियम की खास बातें
- अब निजी वाहन (कार/बाइक) के फिटनेस और PUC टेस्ट भी ATS पर होंगे
- टेस्ट के दौरान 10 सेकंड का जियो-टैग किया गया वीडियो अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिससे परीक्षण प्रमाणित हो सके।
- दस्तावेज़ भरकर घर बैठे सर्टिफिकेट पाने का पुराना सिस्टम धीरे-धीरे खत्म होगा।
रोड सेफ्टी और पर्यावरण के लिए फ़ायदा
यह कदम सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देगा, क्योंकि केवल सही ढंग से फिट वाहन ही सड़कों पर चल सकेंगे। साथ ही, वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण भी कम होगा, जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
टेस्ट में वीडियो प्रूफ और पारदर्शिता
सरकार नई प्रक्रिया में यह भी कह रही है कि फिटनेस टेस्ट के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग और GPS-टैग वीडियो को अपलोड करना अनिवार्य होगा। इससे जांच अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी, और गलत सर्टिफिकेट जारी होने की संभावना कम होगी।
ATS नेटवर्क का विस्तार
देश भर में ATS नेटवर्क को बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ राज्यों में पहले से ही ऐसे कई स्टेशन चल रहे हैं, और नई इकाइयों को स्थापित किया जा रहा है ताकि परीक्षण सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हो सकें।
भारत में वाहन फिटनेस टेस्टिंग नियमों (2026) में बदलाव एक बड़ा सुधार है। ATS पर आधारित, मशीन-आधारित परीक्षण से सेफ्टी, पारदर्शिता और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। सभी वाहन मालिकों को जल्द से जल्द अपने वाहन टेस्ट के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि यह नियम जल्द लागू होने वाले हैं।










