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Gaming Effects on Brain: ज्यादा गेमिंग से कौन-सा हार्मोन होता है एक्टिव? जानिए फायदे और नुकसान

By Riya Kumari

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Gaming Effects on Brain: ज्यादा गेमिंग से कौन-सा हार्मोन होता है एक्टिव? जानिए फायदे और नुकसान

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सोशल संवाद / डेस्क : आज के डिजिटल युग में वीडियो गेम बच्चों से लेकर बड़ों तक की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। मोबाइल, लैपटॉप और गेमिंग कंसोल पर घंटों खेलना अब आम है। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि ज्यादा गेमिंग से दिमाग और शरीर पर क्या असर पड़ता है नुकसान ज्यादा हैं या फायदे भी? वैज्ञानिकों के अनुसार, गेमिंग का सीधा प्रभाव हमारे ब्रेन और हार्मोन सिस्टम पर पड़ता है। आइए समझते हैं कि गेमिंग के दौरान कौन-सा हार्मोन एक्टिव होता है और शरीर में क्या बदलाव आते हैं।

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गेमिंग और दिमाग का कनेक्शन

आधुनिक वीडियो गेम इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि खिलाड़ी लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें। रंग, साउंड, टास्क, रिवॉर्ड सिस्टम और लेवल-अप जैसे एलिमेंट्स दिमाग को लगातार स्टिम्युलेट करते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि गेमिंग के दौरान रिवॉर्ड, इमोशन और डिसीजन-मेकिंग से जुड़े कई ब्रेन एरिया एक साथ एक्टिव हो जाते हैं।

डोपामिन: गेमिंग का सबसे बड़ा हार्मोन

गेम खेलते समय सबसे अहम भूमिका डोपामिन की होती है, जिसे “फील-गुड हार्मोन” कहा जाता है। लेवल पूरा करना, जीतना या रिवॉर्ड मिलना इन सब पर दिमाग डोपामिन रिलीज करता है। इससे खुशी और उत्साह बढ़ता है और दोबारा खेलने की इच्छा पैदा होती है।

हालांकि, अत्यधिक और लगातार गेमिंग से दिमाग जरूरत से ज्यादा डोपामिन रिलीज करने लगता है। समय के साथ दिमाग इसकी आदत बना लेता है और संवेदनशीलता घट जाती है। नतीजतन, पहले जैसी खुशी पाने के लिए ज्यादा गेम खेलना पड़ता है। यही कारण है कि अधिक गेमिंग करने वालों में थकान, चिड़चिड़ापन, फोकस की कमी और ब्रेन फॉग जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

फाइट या फ्लाइट मोड क्यों हो जाता है एक्टिव?

एक्शन और फाइटिंग गेम्स खेलते समय शरीर का फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स भी एक्टिव हो सकता है। यह वही सिस्टम है जो खतरे की स्थिति में हमें सतर्क करता है। कई बार दिमाग गेम की परिस्थितियों को असली खतरे जैसा मान लेता है, जिससे बेचैनी, गुस्सा और आक्रामकता बढ़ सकती है। इस दौरान भावनात्मक प्रतिक्रिया हावी हो जाती है और तार्किक सोच कमजोर पड़ सकती है।

संतुलन ही है समाधान

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित और संतुलित गेमिंग फोकस, रिफ्लेक्स और समस्या-समाधान कौशल को बेहतर बना सकती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा गेमिंग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इसलिए समय तय करें, ब्रेक लें और ऑफलाइन गतिविधियों को भी दिनचर्या में शामिल करें।

गेमिंग सीधे तौर पर डोपामिन और फाइट फ्लाइट सिस्टम को प्रभावित करती है। सही संतुलन रखा जाए तो फायदे मिलते हैं, वरना नुकसान बढ़ सकते हैं।

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