सोशल संवाद/डेस्क : शहर में कचरा उठाने की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अब तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। आने वाले समय में कचरा उठाने वाली गाड़ियों पर GPS लगाया जाएगा। इससे अधिकारियों को गाड़ी की लोकेशन और उसके रूट की जानकारी मिलती रहेगी। यानी यह भी आसानी से पता चल सकेगा कि गाड़ी तय इलाके में पहुंची या नहीं।
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नई व्यवस्था में सिर्फ कचरा उठाने पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि घर से कचरा निकलने के बाद उसके निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने की तैयारी है। इसका मकसद शहर में कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित करना और खुले में कचरा जमा होने की समस्या को कम करना है।
घर से ही अलग करना होगा कचरा
नई व्यवस्था में लोगों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने की अपील की जाएगी। कचरा उठाने वाली गाड़ियां भी इसे अलग-अलग लेकर जाएंगी। इससे आगे कचरे की छंटाई और प्रोसेसिंग में आसानी होगी।
गीले कचरे से खाद और बायोगैस बनाने की योजना है, जबकि प्लास्टिक और दूसरे उपयोगी सूखे कचरे को अलग कर रिसाइकिल किया जाएगा। इससे कचरे का दोबारा इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
खुले में कचरा फेंकने की समस्या पर भी जोर
शहर के कई इलाकों में सड़क किनारे कचरा जमा होने की शिकायत आती रहती है। कई जगहों पर लोग खुले में कचरा फेंक देते हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को बदबू और गंदगी की परेशानी होती है।
GPS से निगरानी शुरू होने के बाद कचरा उठाने वाली गाड़ियों के तय रूट पर भी नजर रखी जा सकेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस इलाके से कचरा नियमित रूप से उठ रहा है और कहां व्यवस्था में कमी है।
कई एजेंसियां मिलकर करेंगी काम
इस पूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए संबंधित नगर निकायों और टाटा स्टील यूआईएसएल समेत दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। कचरे के संग्रहण से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक एक व्यवस्थित सिस्टम तैयार करने की योजना है।
पोटका में तैयार किए जा रहे कचरा निस्तारण केंद्र को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। इसके 2027 तक शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अगर यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो शहर में कचरा उठाने की निगरानी बेहतर हो सकती है और लोगों को सड़क किनारे जमा कचरे से भी राहत मिलने की उम्मीद है।









