सोशल संवाद / डेस्क : महान स्वतंत्रता सेनानी, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और जननायक Birsa Munda की पुण्यतिथि पर झारखंड में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने धरती आबा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संघर्ष, बलिदान और सामाजिक चेतना के संदेश को याद किया।
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राज्यपाल ने दी श्रद्धांजलि
राज्यपाल ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया तथा शोषण और अन्याय के खिलाफ जनआंदोलन का नेतृत्व किया। उनका जीवन समाज को साहस, आत्मसम्मान और स्वाभिमान का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने किया नमन
मुख्यमंत्री ने भी भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और कहा कि धरती आबा का जीवन आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने सामाजिक जागरण, शिक्षा और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी थी।
राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया याद
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ नहीं था, बल्कि सामाजिक कुरीतियों और शोषण के विरुद्ध भी था। उनके विचार आज भी समाज को एकजुटता, आत्मनिर्भरता और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
विभिन्न स्थानों पर हुए कार्यक्रम
राज्यभर में कई सरकारी और सामाजिक संस्थाओं द्वारा श्रद्धांजलि सभाओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया गया। लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
झारखंड की पहचान हैं बिरसा मुंडा
भगवान बिरसा मुंडा को झारखंड की पहचान और आदिवासी गौरव का प्रतीक माना जाता है। उनका जीवन संघर्ष, नेतृत्व और जनसेवा की मिसाल है, जिसे आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी।









