सोशल संवाद / नई दिल्ली : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में 9वें सिख गुरु तेगबहादुर जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि गुरु तेगबहादुर का जीवन, उनका त्याग और उनका चरित्र केवल किसी एक कालखंड या समुदाय की कहानी नहीं है।
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यह मानव इतिहास में साहस, सत्य, धर्मनिष्ठा और मानवीय मूल्यों का शाश्वत आदर्श है। सीएम ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी को सिर्फ एक पंथ के गुरु के रूप में देखना उनके विराट व्यक्तित्व को सीमित करना होगा। वह भारत की साझा संस्कृति, चेतना और मूल्यों के सबसे बड़े रक्षक थे।
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा गुरु तेगबहादुर के 350वें शहीदी वर्ष के अवसर पर लाल किला परिसर में आयोजित तीन दिवसीय भव्य और दिव्य समागम सिर्फ एक कार्यक्रम मात्र नहीं है, बल्कि इतिहास को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त प्रयास था। उन्होंने विनम्रता के साथ कहा कि इस आयोजन में उनका कोई व्यक्तिगत श्रेय नहीं है, जो कुछ हुआ, वह गुरु साहिब जी की कृपा और मेहरबानी से ही संभव हुआ।
लाल किला पर ऐसे जुटे लाखों श्रद्धालु
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि कुछ समय पहले लाल किला के बाहर हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद सभी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। लेकिन उन्होंने देश के गृह मंत्री अमित शाह से सुरक्षा को लेकर बात की और केंद्र सरकार के सहयोग से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। इसी वजह से लाखों श्रद्धालुओं ने गुरु साहिब के समागम में भाग लिया। उन्होंने सदन में बताया कि समागम में श्रद्धालुओं की संख्या इतनी थी कि आयोजन स्थल के टेंट को और विस्तार देना पड़ा। यह दिखाता है कि गुरु साहिब जी का बलिदान आज भी जन-जन के दिलों में जीवित है।
दमन के केंद्र पर गूंजी ‘गुरबाणी’
गुरु साहिब जी के बलिदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने भावुक स्वर में कहा कि यह ऐतिहासिक संयोग है कि जिस लाल किला से कभी गुरु तेगबहादुर जी के खिलाफ फरमान जारी हुए थे, उसी लाल किला पर आज गुरबाणी के मधुर स्वर गूंजे, हजारों श्रद्धालु श्रद्धा से नतमस्तक हुए और लंगर के माध्यम से सेवा और समानता की भावना का सजीव उदाहरण देखने को मिला। उन्होंने बताया कि समागम के दौरान बनाए गए संग्रहालय में गुरु साहिब के जीवन, उनके संघर्ष और शहादत से जुड़ी घटनाओं का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया गया।
किताबों से नई पीढ़ी तक पहुंचेगी गुरु-गाथा
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि गुरु तेगबहादुर की गाथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से शिक्षा विभाग द्वारा दिल्ली के स्कूलों में पांच लाख पुस्तकें बांटी। साथ ही, दिल्ली सरकार के स्कूलों के बच्चों को उन गुरुद्वारों में ले जाया गया, जहां-जहां गुरु तेगबहादुर जी का आगमन हुआ था।
गुरु तेगबहादुर के विचारों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके अमर वचन दोहराए-
“धरम हेत साका जिनि कीआ, सीस दीआ पर सिर न दीआ।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए अपना शीश अर्पित कर दिया, लेकिन अपने सिद्धांतों और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने मुगल शासक औरंगजेब के सामने झुकने से इनकार कर दिया। गुरु साहिब जी ने कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी को “हिंद की चादर” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने न सिर्फ अपने धर्म की, बल्कि दूसरों की आस्था की भी रक्षा की। दिल्ली के गुरुद्वारा सीसगंज साहिब और रकाब गंज साहिब उनकी शहादत और बलिदान का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जो समाज अपने इतिहास और जड़ों से कट जाते हैं, वे तेज हवाओं में तिनकों की तरह बिखर जाते हैं। अपनी संस्कृति पर गर्व करना, संस्कारों का सम्मान करना और अपने पुरखों के बलिदान को याद करना हम सभी का दायित्व है।
श्रेष्ठ भारत श्रेष्ठ दिल्ली का का संकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा ‘विकास भी और विरासत भी’ की बात करते हैं। दिल्ली सरकार भी इसी विजन के तहत काम कर रही है। दिल्ली सरकार दिल्ली में रहने वाले हर नागरिक को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली आज ‘मिनी इंडिया’ और ]एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की सजीव तस्वीर बन चुकी है। उनकी सरकार ने उत्तर से लेकर दक्षिण तक के त्योहारों- कांवड़ यात्रा, रामलीला, छठ महापर्व, गरबा, तीज, ओणम को भी बड़े उत्साह से मनाया है।
दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री ने दिल्ली की जनता को विश्वास दिलाया कि उनकी सरकार संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार काम करती रहेगी। दिल्ली को एक परिवार की तरह, एक भारत श्रेष्ठ भारत के सूत्र में पिरोकर हर नागरिक को साथ लेकर आगे बढ़ा जाएगा।










