सोशल संवाद/डेस्क : आज के तेज़ रफ्तार दौर में गुस्सा एक आम समस्या बनता जा रहा है, खासकर युवाओं में। छोटी-छोटी बातों पर नाराज़ हो जाना, बिना सोचे-समझे तीखी प्रतिक्रिया देना और बाद में पछताना अब जैसे रोज़मर्रा की आदत बन गई है। गुस्से में कही गई एक बात रिश्तों में दूरियां पैदा कर सकती है और कई बार हालात ऐसे बिगड़ जाते हैं कि संभालना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं, लगातार गुस्सा करना हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। ऐसे में ज़रूरी है कि हम अपने गुस्से को समझें और उस पर काबू पाने की कोशिश करें।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उसे किस तरह व्यक्त किया जाए, यही सबसे अहम बात है। हर स्थिति में गुस्सा दबाना भी सही नहीं होता और हर बात पर फूट पड़ना भी नुकसानदायक है। संतुलन बनाए रखना ही बेहतर जीवन की कुंजी है। अगर आप भी हर छोटी बात पर गुस्सा करने लगते हैं, तो कुछ आसान उपाय आपकी ज़िंदगी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
सबसे पहले ज़रूरी है अपनी ऊर्जा को सही दिशा देना। गुस्सा असल में एक तरह की ऊर्जा ही है, जो अगर बाहर नहीं निकली तो अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती है। इस ऊर्जा को किसी सकारात्मक काम में लगाना बेहद फायदेमंद होता है। रोज़ाना एक्सरसाइज करना, दौड़ लगाना, योग करना या फिर डांस जैसी गतिविधियों में शामिल होना गुस्से को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा पेंटिंग, म्यूजिक, गार्डनिंग या किसी पसंदीदा हॉबी के लिए समय निकालना भी मन को शांत करता है और नकारात्मक भावनाओं को कम करता है।

जब भी गुस्सा आए, तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। अक्सर लोग गुस्से में ऐसे शब्द बोल जाते हैं, जिनका असर लंबे समय तक रहता है। ऐसे समय में चुप रहना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। खुद को कुछ सेकंड या कुछ मिनट का वक्त दें। आप चाहें तो 1 से 10 तक उल्टी गिनती गिनें या गहरी सांस लें। यह छोटा सा ब्रेक आपके दिमाग को शांत करने में मदद करेगा और आप बिना पछतावे के सही फैसला ले पाएंगे।
संगीत भी गुस्से को काबू में करने का एक प्रभावी तरीका है। जब मन अशांत हो, तब हल्का और सुकून देने वाला संगीत सुनना बेहद फायदेमंद होता है। शांत धुनें और धीमा संगीत आपके मूड को बदल सकता है और तनाव को कम कर सकता है। ध्यान रखें कि बहुत तेज़ और शोर भरा म्यूजिक कभी-कभी गुस्से को और बढ़ा सकता है, इसलिए सही तरह का संगीत चुनना ज़रूरी है।

योग और मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में शामिल करना भी गुस्से पर नियंत्रण पाने का मजबूत तरीका है। रोज़ाना कुछ मिनट ध्यान लगाने से दिमाग शांत रहता है और विचारों में स्थिरता आती है। मेडिटेशन से व्यक्ति अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ पाता है और मुश्किल हालात में भी संतुलन बनाए रखता है। योगासन और प्राणायाम न सिर्फ मानसिक तनाव कम करते हैं, बल्कि शरीर को भी स्वस्थ रखते हैं।

कई बार गुस्सा इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हम अपनी भावनाओं को भीतर ही भीतर दबाए रखते हैं। ऐसे में अपनी भावनाओं को कागज पर उतारना बेहद मददगार हो सकता है। एक डायरी रखें और उसमें लिखें कि आपको किस बात पर गुस्सा आया, उस समय आपने कैसा महसूस किया और आप उस स्थिति को बेहतर तरीके से कैसे संभाल सकते थे। लिखने से मन हल्का होता है और आप अपने व्यवहार को समझने लगते हैं।
इसके अलावा, अपनी दिनचर्या और जीवनशैली पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। पर्याप्त नींद न लेना, अनियमित खानपान और लगातार तनाव में रहना गुस्से को बढ़ा सकता है। संतुलित आहार, पूरी नींद और खुद के लिए थोड़ा वक्त निकालना मानसिक शांति के लिए जरूरी है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि गुस्से पर काबू पाना कोई एक दिन का काम नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर अभ्यास है। धीरे-धीरे जब आप खुद को समझने लगेंगे और सही तरीकों को अपनाएंगे, तो न सिर्फ आपका व्यवहार बदलेगा, बल्कि आपके रिश्ते और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती जाएगी। गुस्से को हराने का मतलब खुद को मजबूत बनाना है, और यही एक खुशहाल जिंदगी की असली पहचान है।










