सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म होने के बाद अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य से जुड़े दूसरे बड़े मुद्दों पर फोकस करना शुरू कर दिया है। इनमें सबसे अहम मुद्दा ‘खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) संशोधन विधेयक 2026’ (MMDR Amendment Bill 2026) को लेकर है।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ कहा है कि झारखंड सरकार इस विधेयक का लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी स्तर पर विरोध करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने राज्यों से पर्याप्त विचार-विमर्श किए बिना ही विधेयक को पारित कराया है।
‘राज्यों को भरोसे में लिए बिना किया गया बदलाव’
रांची में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र की ओर से MMDR Act में किए गए बदलाव नुकसानदेह और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उनका दावा है कि इन बदलावों का असर राज्य के आदिवासी, दलित, गरीब, किसान और मजदूर वर्ग पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज संपदा केवल उद्योगों और कंपनियों से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्यों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के हितों से भी है।
हेमंत सोरेन ने यह बातें सोहराई भवन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहीं। बैठक में MMDR संशोधन विधेयक समेत राज्य से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
नुकसान की भरपाई कौन करेगा? हेमंत सोरेन का सवाल
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि यदि MMDR कानून में बदलाव से राज्यों को आर्थिक नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई कौन करेगा?
हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों से विचार-विमर्श किए बिना बदलाव किए हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आने वाले समय में इससे झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पुराने बकाये की भरपाई अभी तक नहीं हुई है, तो नए बदलावों से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
केंद्र पर 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया होने का दावा
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार ने कोयला कंपनियों से जुड़े करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष अपना दावा पहले ही पेश कर रखा है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य को पहले से ही अपने बकाये की वसूली को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में MMDR कानून में प्रस्तावित बदलावों से राज्य के राजस्व पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
झारखंड सरकार करेगी हर स्तर पर विरोध
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार इस मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। राज्य सरकार विधेयक का विरोध लोकतांत्रिक, संवैधानिक और कानूनी सभी मंचों पर करेगी।
उन्होंने संकेत दिया कि झारखंड अपने खनिज संसाधनों, राज्य के राजस्व और आम लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र के सामने मजबूती से अपनी बात रखेगा।









