सोशल संवाद / रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर सत्ता, संघर्ष, कानूनी चुनौतियों और निजी जीवन में गहरे दुखों से जुड़ा रहा है। बीते कुछ वर्षों में सोरेन परिवार ने कई करीबी लोगों को खोया है। इन घटनाओं के बीच हेमंत सोरेन के सामने सरकार चलाने और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती भी रही है।
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पिता शिबू सोरेन के निधन से लगा बड़ा झटका
झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं और झामुमो के संस्थापक संरक्षक शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उनके निधन से राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हुआ। हेमंत सोरेन के लिए यह व्यक्तिगत क्षति के साथ-साथ अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी भी थी।
मां रूपी सोरेन के निधन से परिवार में शोक
7 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं। उनके निधन से सोरेन परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। इससे पहले सितंबर में उन्हें बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद ले जाया गया था। बाद में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
राजनीतिक जीवन में भी आईं कई चुनौतियां
हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर भी कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। वर्ष 2024 में कथित भूमि घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिली। इस घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की। संबंधित मामले में आरोपों और न्यायिक प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।
झामुमो की विरासत और आगे की जिम्मेदारी
शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन और आदिवासी अधिकारों की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन के बाद हेमंत सोरेन के सामने इस विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भूमि अधिकार, विस्थापन, आदिवासी पहचान और राज्य के विकास जैसे मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी भी है। राजनीतिक विश्लेषकों ने इन विषयों को झामुमो और हेमंत सोरेन के लिए अहम चुनौती बताया है।
निजी दुखों के बीच सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारी
पिता और मां के निधन ने हेमंत सोरेन के परिवार को लगातार दो वर्षों में गहरे दुखों से गुजारा है। वहीं, मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां और राजनीतिक चुनौतियां भी निभानी हैं। उनके आगे का राजनीतिक सफर किस दिशा में बढ़ेगा, यह सरकार के फैसलों, जनहित के मुद्दों और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।











