सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के तिनसुकिया में आयोजित ऑल असम आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AASAA) महासभा-2026 को संबोधित करते हुए असम के आदिवासी समुदाय के प्रति समर्थन और एकता का मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड आदिवासी समुदाय हर सुख-दुख की घड़ी में अपने भाइयों-बहनों के साथ खड़ा रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर झारखंड के आदिवासी भी असम में समर्थन के लिए आएंगे ।

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सोरेन ने सभा में आदिवासी समाज की एकजुटता, अधिकारों और पहचान की रक्षा पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति और परंपरा भारत की समृद्ध विरासत का अहम हिस्सा हैं, जिनके लिए समर्पित प्रयास होना चाहिए।
आदमियों की भारी मौजूदगी में दिए गए अपने संबोधन में हेमंत सोरेन ने कहा कि असम में आदिवासी समाज कई चुनौतियों और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं का सामना कर रहा है। उन्होंने केंद्र और असम सरकार पर आदिवासियों को उपेक्षित करने का आरोप भी लगाया, यह संकेत देते हुए कि राजनीतिक तथा चुनावी माहौल में आदिवासी अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है।
इस मौके पर सोरेन ने आदिवासी नेताओं और समुदायों के संगठनों से संवाद बढ़ाने की बात कही और कहा कि झारखंड और असम के आदिवासी भाई-बहनों के बीच आपसी समर्थन और सहयोग भविष्य में भी जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि हेमंत सोरेन का यह कदम न केवल आदिवासी समुदाय के हक-अधिकारों को उजागर करने वाला संदेश है, बल्कि आगामी चुनावों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहाँ आदिवासी मतदाताओं की भागीदारी और समर्थन एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।










