सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार की ओर से कथित गड़बड़ियों के आधार पर 22 भर्ती परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को रद्द करने के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। खास तौर पर 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और इससे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक से पहले से नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
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हालांकि, हाईकोर्ट की यह रोक अंतिम फैसला नहीं है। यानी फिलहाल नियुक्त कर्मचारी अपनी नौकरी में बने रहेंगे, लेकिन भर्ती प्रक्रिया की वैधता को लेकर अंतिम स्थिति अदालत के आगे के आदेश पर निर्भर करेगी।
पहले समझिए, सरकार ने क्या फैसला लिया था?
झारखंड सरकार ने 18 अगस्त 2026 को कथित भर्ती गड़बड़ियों के मामले में कई बड़ी कार्रवाई की थी। सरकार के फैसले के तहत:
- 22 भर्ती परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
- 6 भर्ती प्रक्रियाओं को जांच पूरी होने तक रोक दिया गया।
- 17 पुरानी JPSC भर्तियों की जांच CID को सौंपी गई।
- इस तरह कुल 45 भर्ती प्रक्रियाएं सरकार के फैसले से प्रभावित हुईं।
सरकार का यह कदम लंबे समय से चल रहे JPSC-JSSC छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाया गया था।
सबसे बड़ा सवाल- जिनकी नौकरी लग चुकी है, उनका क्या होगा?
सरकार के फैसले में सबसे ज्यादा चिंता उन अभ्यर्थियों को लेकर थी, जिनकी भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और वे सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे थे।
मसलन, 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से 342 पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। इसी तरह JSSC-CGL के जरिए करीब 1,932 उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी थी।
ऐसे में पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द होने का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता था, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद चयन प्रक्रिया पूरी की, नियुक्ति पत्र हासिल किया और सरकारी सेवा ज्वाइन कर ली।
हाईकोर्ट की रोक का क्या मतलब है?
हाईकोर्ट की ओर से फिलहाल रोक लगाए जाने का सबसे सीधा मतलब यह है कि सरकार का भर्ती रद्द करने का फैसला अभी प्रभावी नहीं होगा।
यानी:
1. नौकरी कर रहे कर्मचारियों को फिलहाल राहत मिली है।
11वीं-13वीं JPSC समेत संबंधित नियुक्तियों पर तत्काल कोई कार्रवाई नहीं होगी।
2. नियुक्तियां फिलहाल बनी रहेंगी।
सरकार केवल अपने आदेश के आधार पर अभी इन नियुक्तियों को समाप्त नहीं कर सकती।
3. मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगाई है। भर्ती प्रक्रिया सही थी या उसमें अनियमितताएं हुई थीं, इसका अंतिम फैसला आगे की सुनवाई में हो सकता है।
4. अंतिम फैसला अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
अगर आगे अदालत सरकार के फैसले को सही ठहराती है, तो स्थिति दोबारा बदल सकती है। वहीं, अगर सरकार का आदेश निरस्त होता है, तो नियुक्त कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
FSO भर्ती को लेकर भी राहत
खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (FSO) भर्ती को लेकर सरकार के रद्द करने के फैसले पर भी हाईकोर्ट की रोक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस भर्ती प्रक्रिया में भी अभ्यर्थियों का चयन आगे बढ़ चुका था। ऐसे में हाईकोर्ट की अंतरिम राहत से प्रभावित उम्मीदवारों को फिलहाल राहत मिली है।
JPSC-JSSC विवाद में अब आगे क्या होगा?
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण होगी हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले दस्तावेज। अदालत यह देखेगी कि भर्ती प्रक्रियाओं में जिन कथित अनियमितताओं के आधार पर सरकार ने कार्रवाई की, उनके लिए पर्याप्त कानूनी और तथ्यात्मक आधार मौजूद हैं या नहीं।
दूसरी ओर, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच भी इस मामले में अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए फिलहाल नियुक्त कर्मचारियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन JPSC-JSSC भर्ती विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है।









