सोशल संवाद / डेस्क : सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील (PM POSHAN) में अंडे की जगह शाकाहारी विकल्प देने को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या दाल और सब्जियां बच्चों को अंडे जितना पोषण दे सकती हैं? पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों खाद्य पदार्थों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन उनकी पोषण गुणवत्ता और शरीर में अवशोषण की क्षमता अलग होती है।
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अंडा क्यों माना जाता है बेहतर प्रोटीन स्रोत?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक सामान्य अंडे में लगभग 6 से 7 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन होता है। इसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी 9 जरूरी अमीनो एसिड मौजूद रहते हैं, इसलिए इसे Complete Protein माना जाता है। बढ़ते बच्चों की मांसपेशियों, हड्डियों और मस्तिष्क के विकास में अंडे की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
क्या दाल अंडे की जगह ले सकती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि दाल भी प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। लगभग 50 ग्राम कच्ची दाल पकने के बाद करीब 12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध करा सकती है। इसके अलावा दाल में फाइबर, आयरन और कई अन्य पोषक तत्व भी होते हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। हालांकि, दाल का प्रोटीन अंडे की तुलना में शरीर द्वारा उतनी आसानी से अवशोषित नहीं होता।
सबसे बड़ा अंतर क्या है?
पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक, अंडे का प्रोटीन अधिक बायोअवेलेबल (Bioavailable) होता है, यानी शरीर उसे तेजी और बेहतर तरीके से उपयोग कर सकता है। वहीं दाल के साथ कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी अधिक होती है। इसलिए यदि अंडे की जगह शाकाहारी विकल्प दिए जाएं, तो केवल दाल ही नहीं बल्कि दूध, दही, पनीर, सोया, चना और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को भी भोजन में शामिल करना जरूरी होगा।
बच्चों के पोषण के लिए क्या जरूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को प्रतिदिन पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन, आयरन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिलें। यदि अंडे की जगह समान पोषण देने वाला संतुलित शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाए, तो बच्चों के विकास पर नकारात्मक असर कम हो सकता है। लेकिन पोषण की भरपाई किए बिना केवल अंडे हटाने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
विशेषज्ञों की सलाह
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के लिए भोजन तैयार करते समय किसी एक खाद्य पदार्थ की बजाय संतुलित आहार पर ध्यान देना चाहिए। अंडा हो या शाकाहारी विकल्प, दोनों का उद्देश्य बच्चों को पर्याप्त पोषण देना होना चाहिए ताकि उनके विकास और स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।










