सोशल संवाद / डेस्क : दुनियाभर में एक बार फिर हंता वायरस (Hantavirus) चर्चा में है। हाल ही में क्रूज शिप से जुड़े मामलों के बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह वायरस कोरोना की तरह तेजी से फैल सकता है? क्या संक्रमित व्यक्ति को छूने से भी संक्रमण हो जाता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं हंता वायरस कितना खतरनाक है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
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क्या है हंता वायरस?
हंता वायरस एक रोडेंट-बोर्न वायरस है, यानी यह मुख्य रूप से चूहे और अन्य कृंतकों के जरिए फैलता है। संक्रमित चूहों की लार, पेशाब या मल के संपर्क में आने पर इंसान संक्रमित हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह वायरस फेफड़ों और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ मामलों में इसकी मृत्यु दर 40% तक भी देखी गई है।
क्या छूने से फैलता है संक्रमण?
आम तौर पर हंता वायरस कोरोना की तरह आसानी से इंसान से इंसान में नहीं फैलता। अधिकतर मामलों में संक्रमण संक्रमित चूहों के संपर्क से होता है। हालांकि, दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले एंडीज वायरस स्ट्रेन में सीमित मानव-से-मानव संक्रमण के मामले सामने आए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल सामान्य छूने या साथ बैठने से संक्रमण का खतरा बहुत कम माना जाता है। लंबे और बेहद करीबी संपर्क में कुछ मामलों में संक्रमण संभव हो सकता है।
कोरोना से कितना अलग है हंता वायरस?
कोरोना वायरस हवा के जरिए तेजी से फैलता था, जबकि हंता वायरस का संक्रमण इतना आसान नहीं है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे फिलहाल कोविड जैसी महामारी बनने की संभावना कम मान रहे हैं।
हालांकि, हंता वायरस अधिक घातक माना जाता है क्योंकि गंभीर मामलों में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।
हंता वायरस के प्रमुख लक्षण
हंता वायरस के शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- तेज बुखार
- शरीर और मांसपेशियों में दर्द
- सिरदर्द और थकान
- उल्टी या पेट दर्द
- सांस लेने में दिक्कत
- सूखी खांसी
गंभीर स्थिति में फेफड़ों में पानी भर सकता है और मरीज को ICU तक की जरूरत पड़ सकती है।
कैसे करें बचाव?
- घर और आसपास चूहों को पनपने न दें
- बंद जगहों की सफाई करते समय मास्क और ग्लव्स पहनें
- चूहों के मल-मूत्र को सीधे हाथ से न छुएं
- खाने-पीने की चीजें ढककर रखें
- लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
फिलहाल हंता वायरस का कोई विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है।









