सोशल संवाद / डेस्क : फरवरी मार्च आते ही स्कूलों में परीक्षा का माहौल बन जाता है। खासकर जूनियर क्लास के बच्चों के लिए यह समय बेहद अहम होता है। लेकिन आज के डिजिटल दौर में बच्चों का रुझान पढ़ाई से ज्यादा मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम की ओर बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर उनकी एकाग्रता, व्यवहार और रिजल्ट पर दिखाई देता है।
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ऐसे में माता-पिता के मन में सवाल उठता है कि परीक्षा के समय बच्चों को पढ़ाई पर कैसे फोकस कराएं? आइए जानते हैं कुछ आसान और प्रभावी पेरेंटिंग टिप्स।
बच्चों पर स्क्रीन टाइम का असर
आज मोबाइल और टीवी बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। व्यस्तता के कारण कई बार माता-पिता बच्चों को मोबाइल दे देते हैं, जिससे वे शांत रहते हैं। धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और पढ़ाई के समय भी बच्चा मोबाइल मांगने लगता है।
ज्यादा स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में ये बदलाव देखे जा सकते हैं:
- जल्दी गुस्सा आना
- पढ़ाई में मन न लगना
- बार-बार मोबाइल की जिद करना
- नींद का समय बिगड़ना
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
जूनियर क्लास के बच्चे अभी समझदारी के शुरुआती दौर में होते हैं। उन्हें डांटने के बजाय प्यार और धैर्य से समझाने की जरूरत होती है।
परीक्षा के समय सही पेरेंटिंग कैसे करें?
1. पढ़ाई का नियमित टाइम टेबल बनाएं
बच्चों के लिए छोटा और आसान टाइम टेबल तैयार करें।
- 30–40 मिनट पढ़ाई
- 10 मिनट का ब्रेक
इस तरीके से बच्चा बोर नहीं होगा और उसकी एकाग्रता भी बनी रहेगी।
2. मोबाइल और टीवी का समय तय करें
पूरी तरह से मोबाइल छीन लेना सही उपाय नहीं है।
- दिन में अधिकतम 30 मिनट स्क्रीन टाइम तय करें
- पढ़ाई के समय मोबाइल दूर रखें
इससे बच्चे में अनुशासन की आदत विकसित होगी।
3. घर का माहौल पढ़ाई के अनुकूल बनाएं
बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं।
- परीक्षा के दौरान टीवी कम चलाएं
- शांत वातावरण बनाए रखें
- खुद भी किताब पढ़ने की आदत दिखाएं
घर का सकारात्मक माहौल बच्चे को प्रेरित करता है।
4. साथ बैठकर पढ़ाएं
जूनियर क्लास के बच्चों को अकेला छोड़ देने से उनका ध्यान भटक सकता है। यदि माता-पिता रोज थोड़ा समय साथ बैठकर पढ़ाएं, तो बच्चा ज्यादा मन लगाकर पढ़ता है।
5. पढ़ाई को रोचक बनाएं
- रंगीन चार्ट और चित्रों का इस्तेमाल करें
- कहानी के माध्यम से समझाएं
- छोटे-छोटे सवाल-जवाब करें
जब पढ़ाई मजेदार बनती है, तो बच्चा उसे बोझ नहीं समझता।
6. प्रोत्साहन दें, दबाव नहीं
अगर बच्चा अच्छा प्रदर्शन करता है तो उसकी तारीफ करें।
छोटी उपलब्धि पर भी शाबाशी देना उसके आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
ज्यादा दबाव देने से बच्चा डर और तनाव महसूस कर सकता है।
परीक्षा के समय बच्चों को सही दिशा देना माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। प्यार, धैर्य और समझदारी से किया गया मार्गदर्शन बच्चे के भविष्य को मजबूत बना सकता है। यदि आप बच्चों के स्क्रीन टाइम को संतुलित रखते हुए पढ़ाई को रोचक बनाते हैं, तो वे न सिर्फ अच्छे अंक लाएंगे, बल्कि आत्मविश्वासी भी बनेंगे।










