सोशल संवाद / डेस्क : आज के smartPhone में वॉटरप्रूफिंग फीचर एक अहम मांग बन चुका है। बारिश, पानी में गिरना या नमी के संपर्क में आने जैसी स्थितियों में फोन को सुरक्षित रखने के लिए निर्माता कंपनियाँ विभिन्न तकनीकों का उपयोग करती हैं। आइये जानते हैं किस तरह फोन को पानी-प्रतिरोधी बनाया जाता है, ताकि वह पानी के अंदर या बाहर सुरक्षित रहे।
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डिज़ाइन और इंजीनियरिंग प्लानिंग
सबसे पहले Phone के इंजीनीयर डिज़ाइन के स्तर पर वॉटरप्रूफिंग प्लान तैयार करते हैं। Phone के हर हिस्से जैसे स्क्रीन, बैक पैनल, कैमरा, और पोर्ट्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि पानी अंदर न घुसे। इसके लिए सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर विभाग मिलकर ढांचे की रूपरेखा तैयार करते हैं।

सीलेंट और गैसकेट का उपयोग
Phone के अंदरूनी हिस्सों, जैसे स्पीकर, चार्जिंग पोर्ट और कैमरा बम्प, के आसपास सीलेंट (sealant) और गैसकेट (gasket) लगाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे रबर या सिलिकॉन पार्ट्स होते हैं जो नमी और पानी को अंदर आने से रोकते हैं।
IP रेटिंग टेस्टिंग
Waterproofing की विश्वसनीयता साबित करने के लिए फोन को IP रेटिंग (Ingress Protection) टेस्ट से गुजरना पड़ता है। यह मानक बताएगा कि फोन पानी और धूल से कितनी रक्षा कर सकता है। उदाहरण के लिए, IP67 या IP68 रेटिंग वाले हैंडसेट पानी और धूल से अच्छी सुरक्षा प्रदान करते हैं।

डस्ट और वाटर फिल्ट्रेशन टेस्ट
फोन को पानी के अंदर कुछ समय के लिए डुबाया जाता है ताकि यह जांचा जा सके कि कहीं पानी इंटरनल सर्किट में प्रवेश तो नहीं कर रहा। साथ ही स्पीकर और माइक्रोफोन की कार्यक्षमता भी इस टेस्ट के दौरान चेक की जाती है।
प्रोटेक्टिव लेयर्स और कोटिंग
कुछ स्मार्टफोन में नैनो-कोटिंग या प्रोटेक्टिव लेयर्स लगा दी जाती हैं, जो पानी के अणुओं को फोन के सर्किट तक पहुँचने से रोकती हैं। यह एक एडवांस्ड तरीका है, जिससे फोन को भले ही थोड़ा पानी लगे, वह नुकसान से बचा रहे।

जरूरी है वॉटरप्रूफिंग?
- बारिश या पानी में गिरने पर फोन सुरक्षित रहता है
- पानी के पास उपयोग में राहत
- स्मार्टफोन की लाइफ बढ़ाई जा सकती है
- यूज़र्स के लिए अतिरिक्त सुरक्षा फीचर
आज के मॉडर्न स्मार्टफोन में वॉटरप्रूफिंग तकनीक एक बड़ी विशेषता बन चुकी है। यह तकनीक फोन को सिर्फ पानी के संपर्क से बचाती ही नहीं है, बल्कि अधिक विश्वसनीयता भी प्रदान करती है। यह फीचर खासकर उन लोगों के लिए ज़रूरी है जो रोज़मर्रा में फोन को ऐसे परिस्थितियों में इस्तेमाल करते हैं जहाँ पानी-और धूल संपर्क संभव है।










