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परीक्षा में सफल होना है? तो छात्रों को इन आदतों से बचना सीखना होगा, जाने कोन सी है वो आदते

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : बोर्ड परीक्षा नजदीक आते ही देशभर के लाखों छात्रों में तनाव और दबाव बढ़ने लगता है। घर, स्कूल और कोचिंग की उम्मीदों के बीच कई विद्यार्थी सही दिशा में तैयारी तो करते हैं, लेकिन अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो उनकी मेहनत का असर कम कर देती हैं। शिक्षा और करियर मार्गदर्शन विशेषज्ञ मेघना मिश्रा का मानना है कि यह वह समय है जब छात्र अपनी आदतों में थोड़े बदलाव करके बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से उन बातों का उल्लेख किया है जिन्हें इस समय छात्रों को करने से बचना चाहिए।

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परीक्षा के अंतिम समय में नई किताबें पढ़ने की गलती न करें

अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही परीक्षा करीब आती है, छात्र नई किताबें और नोट्स जुटाना शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका छात्रों को ज्यादा भ्रमित कर देता है। बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए जरूरी है कि विद्यार्थी अपनी पढ़ी हुई मुख्य किताबों, खासकर एनसीईआरटी और स्कूल नोट्स, पर फोकस रखें। इस समय नए कंटेंट के पीछे भागना न केवल समय बर्बाद करता है, बल्कि दिमाग में अनावश्यक दबाव भी बढ़ाता है।

नींद कम करके पढ़ना नुकसानदायक

बहुत से छात्र सोचते हैं कि रात भर जागकर पढ़ाई करना ही सफलता की कुंजी है। मेघना इस सोच को गलत बताती हैं। उनका कहना है कि परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों को सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लेनी चाहिए। अच्छी नींद याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक ताजगी के लिए आवश्यक है। नींद की कमी से दिमाग की क्षमता कमजोर पड़ती है और छात्र पढ़ी हुई बातें भी भूल सकते हैं। इसलिए कम सोने की आदत को तुरंत छोड़ना चाहिए।

सोशल मीडिया से दूरी बनाएं

आज मोबाइल फोन और सोशल मीडिया बोर्ड परीक्षाओं का बड़ा विचलन बन चुके हैं। मेघना का सुझाव है कि छात्र इन दिनों अपना स्क्रीन टाइम सीमित कर दें। सोशल मीडिया ऐप्स अस्थायी रूप से हटाना, नोटिफिकेशन बंद करना या रोज ठोस समय तय कर उपयोग करना एक बेहतर रणनीति है। जितना कम ऑनलाइन समय लगेगा, उतना ही अधिक ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित हो सकेगा।

दूसरों से तुलना करना बंद करें

बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्र अक्सर अपने दोस्तों या टॉपर्स से तुलना करने लगते हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि यह मानसिक दबाव को और बढ़ाता है। हर छात्र की पढ़ाई करने की क्षमता और तरीका अलग होता है। दूसरों को देखकर खुद को कम आंकना आत्मविश्वास तोड़ सकता है। इसलिए स्टूडेंट्स को अपना लक्ष्य अपनी गति और अपनी सुविधा के अनुसार तय करना चाहिए।

कमजोर विषयों से बचना नहीं, उनका सामना करें

अधिकांश विद्यार्थी उन विषयों पर ज्यादा समय लगाते हैं, जिनमें वे पहले से बेहतर होते हैं, और कमजोर अध्यायों से दूरी बनाते हैं। विशेषज्ञ मेघना इसे जोखिमपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि बोर्ड परीक्षा में हर विषय का योगदान होता है। ऐसे में कठिन लगने वाले विषयों को रोज थोड़ा समय देना चाहिए। छोटे-छोटे अभ्यास और नियमित दोहराव से कठिन विषय भी समझ में आने लगते हैं।

पढ़ाई शुरू करने के लिए सही समय का इंतजार न करें

कई छात्र यह सोचते रहते हैं कि जब माहौल शांत हो जाएगा या पूरा प्लान बन जाएगा, तब पढ़ाई शुरू करेंगे। यह सोच समय बर्बाद करती है। मेघना का सुझाव है कि छात्र जहां हैं, जैसे हैं, वहीं से पढ़ाई शुरू कर दें। तैयारी क्रमशः सुधरती रहती है। इंतजार करने से तनाव बढ़ता है और प्रभावी पढ़ाई कम होती जाती है।

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