सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य की 108 एंबुलेंस सेवा को अब Ola-Uber की तर्ज पर संचालित करने की तैयारी की जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीज या घायल व्यक्ति मोबाइल ऐप या कॉल सेंटर के माध्यम से एंबुलेंस आसानी से बुक कर सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में मरीजों को त्वरित और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
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किसी भी अस्पताल में मिलेगा पहुंचाने का विकल्प
नई व्यवस्था के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मरीजों को केवल नजदीकी सरकारी अस्पताल ही नहीं, बल्कि उनकी जरूरत और इच्छा के अनुसार किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में पहुंचाया जा सकेगा। वर्तमान व्यवस्था में कई बार मरीजों को पहले सरकारी अस्पताल ले जाया जाता था, जिससे समय की बर्बादी और असुविधा होती थी। नई नीति लागू होने से गंभीर मरीजों को सीधे बेहतर सुविधा वाले अस्पताल तक पहुंचाने में आसानी होगी।
सेवा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि 108 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से मुफ्त रहेगी। मरीजों या उनके परिजनों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति के कारण किसी भी व्यक्ति को आपातकालीन चिकित्सा सेवा से वंचित न रहना पड़े। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लोगों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक से लैस होंगी एंबुलेंस
नई एंबुलेंस में GPS ट्रैकिंग, MDT डिवाइस और अन्य आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे एंबुलेंस की लोकेशन और समय पर पहुंचने की निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा चालकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे सेवा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे। समय से पहले मरीज तक पहुंचने पर एजेंसियों को प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि देरी होने पर जुर्माने का प्रावधान रखा जाएगा।
निजी एंबुलेंस भी जुड़ेंगी सेवा से
भविष्य में निजी एंबुलेंस को भी 108 सेवा से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत निजी संचालकों को प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। इससे एंबुलेंस की संख्या बढ़ेगी और दूरदराज क्षेत्रों में भी समय पर सेवा उपलब्ध हो सकेगी।
अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी फोकस
बैठक में अस्पतालों में पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी सेवाओं को PPP मोड पर उपलब्ध कराने, तकनीकी स्टाफ की कमी दूर करने और स्वास्थ्य केंद्रों में नई मशीनें व उपकरण खरीदने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य राज्य के जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना है।










