सोशल संवाद / डेस्क : इनकम टैक्स रिफंड का इंतजार कर रहे टैक्सपेयर्स के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट से अहम फैसला आया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ देरी को आधार बनाकर किसी वास्तविक रिफंड क्लेम को खारिज नहीं किया जा सकता। टैक्स अथॉरिटी को यह भी देखना होगा कि क्लेम सही और वास्तविक है या नहीं और देरी के कारण टैक्सपेयर को वास्तविक परेशानी हुई है या नहीं।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला एचएमटी के एक पूर्व कर्मचारी और अन्य संबंधित याचिकाकर्ताओं से जुड़ा है। मामले में Assessment Year 2017-18 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने में देरी हुई थी। टैक्सपेयर्स ने Income Tax Act की Section 119(2)(b) के तहत देरी को माफ करने का अनुरोध किया था।
Principal Commissioner of Income Tax, Panchkula ने देरी माफ करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा। इस मामले के साथ 20 संबंधित याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस दीपक सिबल और जस्टिस सुनीश बिंदल की पीठ ने कहा कि Section 119(2)(b) के तहत देरी से जुड़े रिफंड क्लेम पर विचार करते समय टैक्स अथॉरिटी को केवल समय सीमा देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।
अथॉरिटी को मुख्य रूप से यह देखना चाहिए कि टैक्सपेयर का दावा सही और वास्तविक है या नहीं और उसे राहत नहीं देने पर वास्तविक कठिनाई यानी genuine hardship होगी या नहीं।
टैक्स अथॉरिटी को फिर से करना होगा विचार
हाई कोर्ट ने संबंधित आदेश को रद्द करते हुए मामले को दोबारा विचार के लिए टैक्स अथॉरिटी के पास भेज दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह अंतिम फैसला नहीं दिया कि संबंधित कर्मचारी को रिफंड या टैक्स छूट निश्चित रूप से मिलेगी।
अथॉरिटी को अब मामले के तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करते हुए कानून के अनुसार नया निर्णय लेना होगा।
टैक्सपेयर्स के लिए इसका क्या मतलब?
इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि हर लेट रिफंड क्लेम अपने आप स्वीकार हो जाएगा। देरी के मामलों में संबंधित प्रावधानों और शर्तों का पालन जरूरी रहेगा।
हालांकि, जहां टैक्सपेयर यह दिखा सकता है कि उसका दावा वास्तविक है और देरी के कारण उसे वास्तविक कठिनाई हुई है, वहां केवल देरी को देखकर आवेदन खारिज करने के बजाय मामले के तथ्यों पर विचार करना जरूरी होगा।
Refund Claim में किन बातों का रखें ध्यान?
टैक्सपेयर्स को रिफंड से जुड़े मामलों में अपनी ITR, TDS रिकॉर्ड, बैंक डिटेल और अन्य जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। अगर रिटर्न दाखिल करने में देरी हुई है, तो देरी का कारण और उससे जुड़ा दस्तावेजी प्रमाण भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
सितंबर 2026 में प्रकाशित एक टैक्स रिपोर्ट के अनुसार, समय सीमा निकल जाने के बाद भी कुछ परिस्थितियों में TDS रिफंड का दावा किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए संबंधित नियमों और देरी माफी की प्रक्रिया लागू हो सकती है।











