सोशल संवाद / डेस्क : कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच भारत में विकसित AI आधारित कैंसर प्लेटफॉर्म iOncology.AI BRICS देशों के लिए एक उपयोगी मॉडल बन सकता है। इस तकनीक की मदद से संसाधन सीमित देशों में कैंसर की शुरुआती पहचान, जोखिम का आकलन और उपचार से जुड़े फैसलों में डॉक्टरों को सहायता मिलने की उम्मीद है।
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भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान इस प्लेटफॉर्म की संभावित उपयोगिता को लेकर ‘द BRICS हेल्थ जर्नल’ में 10 सितंबर को एक समीक्षा लेख प्रकाशित हुआ है। लेख में बताया गया है कि स्थानीय मरीजों के आंकड़ों पर आधारित AI मॉडल कैंसर के इलाज और शुरुआती पहचान से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मददगार हो सकते हैं।
एम्स और C-DAC ने मिलकर विकसित किया प्लेटफॉर्म
इस समीक्षा लेख के लेखक प्रो. डॉ. अशोक शर्मा हैं, जो एम्स नई दिल्ली के बायोकेमिस्ट्री विभाग की न्यूरोबायोकेमिस्ट्री डिवीजन और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक लैब से जुड़े हैं।
डॉ. शर्मा के मुताबिक iOncology.AI को भारतीय मरीजों के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से एम्स नई दिल्ली और C-DAC पुणे ने तैयार किया है।
इस AI प्लेटफॉर्म का उद्देश्य डॉक्टरों को कैंसर की शुरुआती पहचान, जोखिम का आकलन और उपचार संबंधी निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना है। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म परीक्षण और चिकित्सकीय मान्यता की प्रक्रिया में है।
BRICS देशों में कैंसर का बढ़ता बोझ
कैंसर का बढ़ता बोझ BRICS देशों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। ग्लोबोकैन 2024 के आंकड़ों के अनुसार, BRICS देशों में हर साल करीब 90 लाख नए कैंसर मामले सामने आते हैं, जबकि लगभग 46.6 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण होती है।
इन देशों में दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2024 में चीन में करीब 51.5 लाख नए कैंसर मामले और 25.8 लाख मौतें दर्ज की गईं। वहीं, भारत में करीब 15.6 लाख नए मामले और लगभग 9 लाख मौतें हुईं।
भारत में आने वाले वर्षों में कैंसर के मामलों में और बढ़ोतरी का अनुमान है। वर्ष 2040 तक देश में नए कैंसर मामलों की संख्या 23.3 लाख तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर में शामिल है।
विशेषज्ञों की कमी और देर से पहचान बड़ी चुनौती
संसाधन सीमित देशों में कैंसर विशेषज्ञों की कमी और बीमारी की देर से पहचान इलाज को चुनौतीपूर्ण बनाती है। ऐसे में स्थानीय मरीजों के आंकड़ों पर प्रशिक्षित AI मॉडल डॉक्टरों के लिए एक सहायक तकनीक के रूप में काम कर सकते हैं।
AI आधारित सिस्टम डॉक्टरों को बीमारी के जोखिम और संभावित उपचार विकल्पों को समझने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन तकनीकों को डॉक्टरों का विकल्प नहीं माना जा रहा है, बल्कि चिकित्सकीय निर्णय में सहायता देने वाले टूल के तौर पर देखा जा रहा है।
BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग की संभावना
रिव्यू में यह भी बताया गया है कि BRICS देशों के बीच स्वास्थ्य आंकड़ों की उपयोगिता, तकनीकी सहयोग और स्थानीय जरूरतों के अनुसार AI मॉडल विकसित करने की संभावनाएं हैं।
हालांकि, किसी भी AI प्लेटफॉर्म को दूसरे देश में लागू करने से पहले वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों की आबादी, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय जरूरतों के अनुसार उसमें बदलाव करना जरूरी होगा।
भारत में विकसित iOncology.AI जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल इंडिया, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और विकसित भारत 2047 जैसे व्यापक डिजिटल स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुरूप भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।










